मैं ईश्वर में कतई विश्वास नहीं करता , न उसके प्रति विश्वास को पुनर्जीवित करने का ही कोई इरादा है | लेकिन जब मैं तमाम धूर्त और चालाक लोगों को देखता हूँ तो संदेह करने का नाटक करने का मन होता है कि हो न हो, कोई ईश्वर अवश्य है | उसके अलावा किसी में यह सामर्थ्य नहीं है जो ऐसे निम्नकोटिक जीव बना सके , पैदा कर सके | किसी टापू पर रहने वाला स्वतंत्र अकेला , अशिक्षित-असभ्य व्यक्ति भी इतना अनैतिक नहीं हो सकता जितना कुछ लोग दिखते हैं | और मज़े की बात - वे बाकायदा सफल भी हैं |
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