उवाच संग्रह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उवाच संग्रह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

मेरा क्या

मेरे विचार यदि किसी अन्य, या किन्हीं दूसरों के विचार नहीं बनते तो वह बेकार हैं । हथेली पर लेकर मुझे चाटना थोड़े ही है !😢

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

झूठ

झूठ का भी औचित्य होता है ।

बच्चों के नाम

प्रेम प्रहार
मुझे सन्देह है कि यदि मेरे बच्चे कल को शारजाह अथवा कनाडा में ही बस जायँ, तो दो तीन पीढ़ी बाद भी वह अपने बच्चों के नाम संस्कृत में धराएँगे ?😢

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

फेल सरकार

दुःखद सूचना --
यह कि भारत ने अपनी ऋषिसुलभ आध्यात्मिक ज़िम्मेदारी नहीं निभाई ।
योगी जी ने, कुछ पुजारियों ने और शिवराज जी अवश्य कुछ हिम्मत दिखाई प्रतिबंध परे सार्वजनिक धार्मिक राजनीतिक कार्यक्रम करके । और चर्च के अनुयायी , इस्लाम के प्रचारकों ने तो अवश्य भक्ति दिखाई । लेकिन सरकार ने कोई भारतीय आध्यात्मिक कर्तव्य नहीं पूरा किया ।
थाली तोड़ने, दिया जलाने के आडम्बर के स्थान पर यह गीता, जिसे ये राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने वाले हैं, का तो उध्दरण देकर देश को आश्वस्त कर ही सकते थे ?
मृत्यु अवश्यम्भावी है । आत्मा अजर अमर है । इससे क्या डरना? अवश्य, संवैधानिक वैज्ञानिक दृष्टि से महामारी से सचेत / बचकर रहना तो लौकिक दृष्टि से आवश्यक है । तो मेरे प्यारे देशवासियो, यह - यह वह एहतियात पूरा बरतो, और अपना सामान्य जनजीवन धैर्य निष्ठा और नागरिकता के साथ जियो । हम और पूरे देश की राजकीय, चिकित्सकीय मशीनरी तुम्हारे साथ है । और किन्ही की यदि मौत आ ही जाती है तो शोक न करो और खुशी खुशी स्वीकार करो । हे पार्थ , गीता।की बात सुनो । जीवन का हथियार कमरे में बन्द होकर मत डालो । तुम्हारा क्या था, क्या लेकर आये थे क्या ले जाओगे । अर्जुन कोरोना से इस प्रकार युद्ध करो ।
अन्यथा किस दिन काम आयेंगी ये धर्म की किताबें जिनमें विश्व का सारा ज्ञान विज्ञान सनातन से भरा पड़ा है ? जिनके बल पर अपनी विश्व गुरुता का दावा सीना ठोंककर करते हो ? अपनी पारी आयी तो देश को अंदर करके निकल लिए?
निश्चय ही भारत ने अपनी आध्यात्मिक, मानसिक, नैतिक साहस की ज़िम्मेदारी नहीं निभाई । इन्हें नम्बर मिले बस दस बटे सौ ।
क्योंकि यदि वायरस पूर्ण समाप्त न हुआ तो क्या साल छः महीने तालाबंदी को खींचना उचित होगा?😢
(गुरुनाथ)

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

मोहब्बत पार्टी

पूछिये मत मुल्क को हुआ क्या है?
एकतरफा की मोहब्बत ही दवा है।

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

मुशायरे में हम

तरीका है क्यों नहीं सत्ता को पकड़ने का ! इन्हीं सत्ताधिकारियों के माध्यम से सत्ता संभालने का !
ये लोग कुछ भी करें, एक शब्द भी बोलें, सही लगे तो वाह वाह बोलें । लेकिन यदि गलत लगे तो मधुमक्खी की तरह छेंक लें , लानत फेंकें, शर्म शर्म के नारे लगाएँ और हूट करें ।
मानो हम मुशायरे में शामिल हों । सुनी कैसे नहीं जायगी हमारी बात ? इसी बहाने उन्ही के माध्यम से हम सत्ता में होंगे । 👍
हीन भाव लाने की ज़रूरत नहीं । यही देखें सांसद विधायक की ही क्या हैसियत होती है सत्ताधारी पार्टी में ? मंत्रियों तक की तो होती नहीं । फिर तो उतनी सत्ता पर हमारा अंकुश पर्याप्त है राजनीति के लिए । 👌

मंगलवार, 31 मार्च 2020

एकलवाद की घोषणा

मैं पाला बदल रहा हूँ । बदल क्या बस नोटिस बोर्ड पर लगा रहा हूँ । I have been Individualist since long, just affirming it in black&white. Let a man do whatever he wants to do. Leave him to make his destiny himself. Who are we to guide or instruct him. Days of evangelist are over. Gods, godmen, preachers, book holders, we are not. So, set the individual being free to decide what is good or bad for their life. This may be called Individualism, I adhere to.
Only personal, individual awakening, enlightment will work. Social evils too can vanish through personal understanding. We can't give all the whole public a right move at one time. Best wishes to our brethren fellow for their free and open minds and conscience to choose the good, better and best (since today). They can ignore whatever we bark in the streets, may that be our psycho attitude, which is in our DNA. Don't mind us, choose and lead your own path.👍

आदमी अलग हो

मैं अब इस चिंता में नहीं हूँ कि हम कैसे एक हों ? मैं नास्तिक हूँ या आस्तिक, संगठित होने की चेष्टा में नहीं हूँ । नास्तिक संगठन की सोचूँगा तो आस्तिक संगठनों के बारे में सोचना पड़ेगा । उन पर नज़र डालूँ तो पाता हूँ कि वे एकताबद्ध होने में बहुत आगे निकल चुके हैं, कोई कम कोई ज़्यादा मजबूत । हम उनसे अपनी तुलना इस तराजू पर न कर पाएँगे । कर पाएँगे तो अकेले अकेले । अकेला आत्मविश्वासी नास्तिक किसी भी अकेले आध्यात्मिक आस्तिक से निपट सकता है।
इसलिए मेरा तो एजेंडा है नास्तिकों को ही नहीं, धार्मिकों को भी अकेला Individual human being, एक इकाई आदमी बनाने का । प्रत्येक नास्तिक प्रत्येक नास्तिक से/ हर आस्तिक हर आस्तिक से कैसे अलग हो, विशिष्ट और विलक्षण मनुष्य, स्वतंत्रता पूर्वक अपने जीवन का जिम्मेदार ! तभी नास्तिक सही नास्तिक हो सकेगा । तब नास्तिक आस्तिक में सामूहिक कोई भेद न होगा । क्योंकि तब तो आस्तिक भी सही आस्तिक होगा ? और हमारी कोई लड़ाई नहीं है सिवा इस उद्देश्य के कि आदमी नेक और नैतिक हो । ज़रूरी है कि हम यह काम उसी पर छोड़ दें । हम गुरुडम के शिकार न हों, यही बेहतर, कारगर रणनीति होगी ।

मंगलवार, 24 मार्च 2020

शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

जीना

हर आदमी को जीने का हक़ है, और उन्हें ज़िंदगी के समान मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी हमारी है ।
(नागरिक उवाच)

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

भोगी हुई कल्पना

केवल भोगा हुआ यथार्थ ही नहीं होता, भोगी हुई कल्पना भी होती है।

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

अति

अति सर्वत्र वर्जयेत नहीं होना चाहिए ।
अतिचिन्तन से अधिक ज्ञान और बड़े निष्कर्ष प्राप्त होते हैं ।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

शादी

शादी है तो वह अरेन्ज्ड ही होगी ।
प्यार में कोई arangement नहीं होता ।

रविवार, 18 मार्च 2018

यहूदी

अज्ञात व्यक्ति को तो आदमी ही मानकर चलना पड़ेगा । यह तो बाद में पता चलेगा कि वह कैसा आदमी है ! स्त्री है या पुरुष, उत्कृष्ट है अथवा निकृष्ट, ईसाई है या यहूदी ?

गुरुवार, 1 मार्च 2018

दुश्मन

दुश्मन है !
जो तुम्हे मदिरा दे
तुम्हारा दुश्मन है,
जो तुम्हें मंदिर दे
वह महा दुश्मन है ।

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018