मंगलवार, 9 जनवरी 2018

सिपाही

सिपाही
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तुम भी सिपाही
वह भी सिपाही
तुम सिपाही
उस सिपाही को
क्यों मारते हो ?
कहीं वह मर गया तो ?
उसके बाल बच्चों,
परिवार का क्या होगा ?
आज तुम उसे मारते हो
कल वह तुम्हें मारेगा तो ?
तो क्या होगा ?
तो क्यों मारते हो ?
क्यों अपनी जान पर तुले हो ?
मत मारो
जब मरना होगा वह मर जायेगा
जब मरना होगा तब तुम मरना ।
अभी क्यों मारते मरते हो ?
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रविवार, 7 जनवरी 2018

बुढापा

पहले बचपन प्यारा होता होगा । फिर जवानी पर घमण्ड होने लगा होगा । अब बुढापा अच्छा लगने लगा है ।

आदमी

पहले आदमी देखिए । फिर देखिएगा उसका देश धर्म जाति आयु लिंग सम्प्रदाय विचारधारा और पार्टी इत्यादि ! पहले से ही आपका पर्याप्त काम चल जाएगा ।

बुद्धिमत्ता

विश्वास कीजिये, मैं आपकी अक़्लमंदी पर भरोसा करना चाहता हूँ । तैयार बैठा हूँ । अक़्लमंदी तो कीजिये !

निर्जन

जनसंख्या तो खूब है । आदमियों की कमी है ।

स्मारक

मैंने कहा था
मत बनाओ विजय स्तम्भ
मीनारें और बुर्ज
ये तुम्हें सालेंगी,
या उन्हें चिढ़ाएँगी
उकसायेंगी बदला लेने को
या पुनः करने को अपमानित
उन्हें जो भूलना चाहते हैं घाव
अपना दम्भ मत याद करो
तुम चुनौतियों से घिर जाओगे
जीत नहीं पाओगे
हार जाओगे
अब हारना हराना छोड़ो
दो रोटी दो धोती का जीवन जियो ।
मत रखो तस्वीरें पुरखों की घर में
बीत चुके गुरुओं, भगवानों की
अब कोई ज़रूरत नहीं इनकी
इतिहास से अब मुक्ति लो
देखो, बाहर चिड़िया बैठी है
चोंच फैलाये और तुम्हारे बच्चे ।

शनिवार, 6 जनवरी 2018

साम्यवाद

ईश्वर नहीं तो आदमी तो है ? और आदमी क्या ईश्वर से कुछ कम आततायी है ? बहुत दुष्ट है यह भी तभी तो इसने अपने यथानुसार ईश्वर बनाये । इसलिए इस मनुष्य की पूरी, अच्छे से खबर रखनी पड़ेगी । मानव विज्ञान , सभ्यता का विकास और साम्यवाद की समझ बनानी पड़ेगी । खाली नास्तिकता से क्या काम चलेगा ।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

सोमवार, 1 जनवरी 2018

नास्तिक को मज़ा

नास्तिकों को मज़ा क्यों आता है अपने को नास्तिक, Atheist कहने में ? जबकि इसके और भी लगभग समानार्थी तमाम आयाम हैं । Secular तो है ही, Non-theist, Anti-theist, Agnostic, Rationalism, Freethought, Radical Humanism, etc.और इनमें से भी बारीक अंतर वाली कई विचारधाराएँ ? सबसे प्रमुख sect Humanism तो Atheists के इस ईश्वर विरोधी रुख पर कुछ खफ़ा भी होता है । जानने की बात है कि humanism, मानववाद (कुछ इसे मानवतावाद कहना prefer करते हैं फिर भी यह Humanitarianism को छूता हुआ भी उससे अलग है) तो इन सारी विचारधाराओं का माई बाप, स्रोत संरक्षक और उत्स, initiative है । मतलब, मनुष्य (Human being) जिसके चिंतन और व्यवहार का केंद्र हो, कोई Supernatural God वगैरह नहीं । वह मानववाद है । और यही सभी सिद्धांतों के मूल में है । फर्क तो आगे चलकर होता है विशेष बातों पर । मानववाद आस्तिकता और धर्म का सकल विरोध न करके अंधविश्वास, जड़ता-कठमुल्लापन और परलोकआश्रिता को मना करता है, मनुष्यों में प्रेम सौहार्द्र का विशेष पक्षधर होता है। नास्तिक सारे पराविचार, पराशक्तियों को समूल, सिरे से नकारते हैं, इसलिए वह तिरछी नज़रों के ज़्यादा शिकार होते हैं ।

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

Plan

"नागरिकता"
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Scientific Poetic Polity
उग्रनाथ नागरिक
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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

छोड़ा

हिन्दू मुस्लिम
सबको देख लिया
जमा न कोई ।

तैरना

जब तक पानी को दोनो हाथों से पीछे ढकेलेंगे नहीं, आगे तैरेंगे कैसे ?

महामानव

हमें विशाल मनुष्य होना चाहिए । चाहे जिस नाते समझ लीजिए । महान हिन्दू होने के नाते, विराट मुस्लिम होने के नाते, विस्तृत ईसाई होने के नाते, तीक्ष्णबुद्धि दार्शनिक- वैज्ञानिक होने के , या स्वतंत्र नास्तिक होने के कारण । किसी भी वजह से हमें विशाल बुद्धि, हृदय, मस्तिष्क और व्यवहार का होना चाहिए । छोटी छोटी बातों, देवी देवताओं में उलझना नहीं चाहिए ।

जड़तामुक्ति

नास्तिकता का मतलब किसी भी आस्था पर जड़ नहीं रहना चाहिए ।
और हाँ, यही एक वाद है जिसे हर मानव परिभाषित करने का हक़दार है । फिर खण्डन का भी । अर्थात पुनर्परिभाषित करने का ।

प्रकृतेश्वर

जब कुदरत, प्रकृति, Nature है ही ईश्वरत्व से भरपूर, तो किसी और ईश्वर को क्यों मानें ?

धर्म भी

परिवर्तन
पहला कदम है
हर क्षेत्र में ।

धर्म

परिवर्तन
पहला कदम है
हर क्षेत्र में ।

Godmen

अभी तक मैं कहता रहा हूँ कि जब तक God और Godmen रहेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता । अब इसमें God worshippers भी जोड़ना पड़ रहा है ।

पढ़ो

अरे पढ़ने लिखने पर ध्यान दो । कहाँ पूजा पाठ को जाते हो !

हीन नास्तिक ?

नास्तिक का नाम लेते ही जो नास्तिक हैं भी, नास्तिकता की सत्यता से सहमत हैं वह भी, हीन भावना, पापबोध के शिकार क्यों हो जाते हैं? मानो वह खुद को खुद ही गाली दे रहे हों । मुसलमान तो ऐसा नहीं सोचते, जबकि उनके इतिहास पर गम्भीर आरोप हैं ! और यह हिन्दू नाम ? यह तो अपने आपमें एक गाली है । तब भी इस पर गर्व किया जाता है ।

चिंतक

जो चिंतक होगा वह नास्तिक होगा ही । जो अपने दिमाग़ का प्रयोग नहीं करेगा वह चिंतन क्या करेगा ?

बराबरी (संस्था)

"बराबरी"  (संस्था)
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समतावादी  :  Egalitarian
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उग्रनाथ श्रीवास्तव "नागरिक"
9415160913

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

कई दुनिया

भारत के अंतर्गत कई भारत हैं यह कहना पर्याप्त नहीं । बल्कि कहना होगा कि भारत के अंदर कई दुनिया हैं ।
एक दुनिया मोदी शाह अडवानी की है । एक दुनिया बच्चन, खानों, विराटानुष्का की है । एक दुनिया दलितों आदिवासियों, वंचितों मजलूमों की है । और सब एक दूसरे से काफी फ़र्क़ और विरोधी हित वादी हैं । विडम्बना, सब भारत में हैं ।
एक दुनिया मजदूर किसान और साथी कम्युनिस्टों की भी है ।
इन्हीं में से एक कोई अलग दुनिया मेरी भी है, लेकिन
मैं औरों की दुनिया की तुलना में अपनी ज़िन्दगी नहीं जीता ।

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

सोमवार, 27 नवंबर 2017

रोग

ठीक न होगा
दवा ले लो कोई भी,
प्रेम का रोग ।

अदावत

अदावत !
नुकसान मेरा भी होगा, लेकिन पता उन्हें भी तो चले कि उनके जड़ राजनीतिक आचरण और कट्टर धार्मिक और विश्वासों के चलते उन्होने मेरे जैसा अच्छा मित्र खो दिया है ।

उजड्ड

क्या उन्हें नहीं पता कि उनके राम मंदिर आंदोलन के चलते अनगिनत समझदार, श्रेष्ठ हिन्दू उनसे विरत हुए हैं ? फिर तो उनको शेष उजड्ड भीड़ से कितनी और किस गुणवत्ता की ताक़त मिलेगी ?

समान मात्रा

रिलिजन और बन्धन समान मात्रा वाले शब्द हैं !

समान मात्रा

रिलिजन और बन्धन समान मात्रा वाले शब्द हैं !

रविवार, 26 नवंबर 2017

गंभीर राजनीति

राजनीति एक गम्भीर कर्म है । यह किन्ही का शौक पूरा करने का साधन नहीं है । कि कोई अपने नाम से या कोई यूँ ही दल/ पार्टी का नाम रखकर चुनाव में खड़ा हो जाय और वोट माँगने चला आये । अरे, किसी विचारधारा के आधार पर ज़िम्मेदारी से राजनीति करने वाली पार्टी के साथ संघर्ष करो  फिर हमारे दरवाज़े आओ ।

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

व्यक्तिजन

हम अपने काम के ज़िम्मेदार हैं/ ज़िम्मेदार रहेंगे/ ज़िम्मेदार बनेंगे ।
यही है Indivualism, व्यक्तिजन वाद ।

बुधवार, 22 नवंबर 2017

म्लेच्छ

ईश्वर को मानने में दिक्कत यह भी है कि इसे वह भी मानते हैं जिन्हें आप म्लेच्छ, आतंकवादी कहते हो ।

Living Being

Living Being
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Only "Living" is also a "Being" .
केवल जीना भी आख़िर तो "होना" है !

अंगुलिमाल

अबकी बार जो अंगुलिमाल मिला तो वह गौतम बुद्ध को छोड़ेगा नहीं । अगर बुद्ध ने मोदी पर उँगली उठाई तो वह उनकी उँगली काट लेगा । अंगुलिमाल ने अब अपना नाम बदल लिया है और वह पाटलिपुत्र राजधानी वाले प्रदेश की एक पार्टी का अध्यक्ष हो गया है ।

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

कमाल पाशा

कभी तो हमने भी हिन्दू राज्य की चाहना की थी । लेकिन तब हमारे मन में कमाल पाशा का आदर्श था । जैसा उन्होंने तुर्की के मुस्लिम राज्य में किया वैसे ही कोई हिंदुस्तान में करता । लेकिन यहाँ तो उल्टे हम और पीछे जा रहे हैं ।

मुख्य धारा

दलित- वंचित, उपेक्षितों की धारा ही भारत की मुख्य धारा है  ।

अम्बेडकर

बाबा साहेब अंबेडकर को भारत का कार्ल मार्क्स माना जाय !

PSS

मुझे खुशी है कि विध्वंसक RSS के बरक्स निर्माणकारी Progressive, PSS पूर्णतः सक्रिय है । प्रत्यक्ष मीडिया या सड़कों पर तो बहुत नहीं लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर, छोटे समूहों में और सोशल मीडिया में इनकी ताक़त का अंदाज़ा लगाया जा सकता है । यह बहुत ज़रूरी काम है । खतरा देश पर ही नहीं समूची मानवता पर आसन्न है । बल्कि PSS नाम से झण्डा भी बना लेना चाहिए, एकजुटता के लिए, शक्ति संगठन के लिए ।

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

बुर्ज़ुआ

बड़े समझदार (प्रोफेसर) लोग वोट देने नहीं जाते ।
बड़े सिद्धांतकार (कम्युनिस्ट) लोग वोट माँगने नहीं जाते ।
नतीजा यह कि बुर्ज़ुआ लोकतंत्र बुर्ज़ुआ वोटर और बुर्ज़ुआ राजनेता के बीच घिसकर दर बुर्ज़ुआ होता चला जा रहा है ।

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

धोखा

चिड़ियों को धोखा देने के लिए खेतों में बिजूका खड़ा कर लेते हैं । अपने को धोखा देने के लिए ईश्वर अल्लाह, मन्दिर मस्जिद ।

मिट्टी

तन मिट्टी का, इतना तो धर्मगुरु अपने भक्तों को बताते हैं । लेकिन भगवान की मूर्ति मिट्टी की है, यह नहीं बताते ।

मंगलवार, 31 अक्तूबर 2017

सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

हैं तो हैं

हिन्दू हैं मुसलमान हैं और सिख हैं तो हैं,
होने के बाद कुछ तो हम अपने भी मन के हैं ?

अयोध्या

बिल्कुल बदलिए स्थानों के नाम । औरंगजेब रोड, मुग़लसराय, तेजोमहालय ! संदेह पक्का हो रहा है वर्तमान अयोध्या भी किसी समृद्ध नगर का बदला हुआ नाम हो सकता है ।

इज़्ज़तघर

नए सरकारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक शौचालय को अब इज़्ज़तघर कहा जाएगा ।
यही बात तो भारत का प्रबुद्ध वर्ग बहुत दिनों से कह रहा है, कि अयोध्या में इज़्ज़तघर बनाओ, मन्दिर नहीं । तब तो इसे आप मान नहीं रहे हो ।

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

आज के कौरव

महाभारत पढ़े हुए भी, इतने सारे लोग कौरवों के पक्ष में क्यों काम कर रहे हैं ?

DD channel

DD channel क्या पं दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया है ?

दीपावली

दिये जलाते
पटाखे फोड़ते हैं
मीठा खाते हैं
बस यही दीवाली
यही दीपावली है ।
(टांका)

हमार संती

मेरी ज़िंदगी
कोई और जी देता
तो अच्छा होता ।

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

रविवार, 8 अक्तूबर 2017

जन्मना धर्म

हिन्दू मुस्लिम
पैदा हुए हो गए
यह क्या बात !

जन्म से

हिन्दू मुस्लिम
पैदा हुए हो गए
यह क्या बात !

उम्र

हासिल नहीं
बस उम्र गुज़ारा
इतना सारा ।

व्यक्तित्व

मैं अलग हूँ
सबसे अलग हूँ
मैं व्यक्तित्व हूँ ।

शनिवार, 7 अक्तूबर 2017