तमाम राज़
तमाम राज़दार?
संभल कर !
उग्रनाथ'नागरिक'(1946, बस्ती) का संपूर्ण सृजनात्मक एवं संरचनात्मक संसार | अध्यात्म,धर्म और राज्य के संबंध में साहित्य,विचार,योजनाएँ एवं कार्यक्रम @
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शनिवार, 11 अप्रैल 2020
मंगलवार, 24 मार्च 2020
शनिवार, 7 मार्च 2020
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020
रविवार, 16 फ़रवरी 2020
शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020
रविवार, 2 फ़रवरी 2020
आग मूते हैं
देशद्रोही था,
अ-नागरिक हुआ
तो क्या अचंभा !
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आग मूते हैं
आख़िर तो मरेंगे
सारे के सारे !
शनिवार, 1 फ़रवरी 2020
गुरुवार, 30 जनवरी 2020
बुधवार, 29 जनवरी 2020
गुरुवार, 23 जनवरी 2020
जननी कौन ?
तीन हाइकु
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कहाँ जाते हो
मंदिर में घण्टा है
बहुत टंटा !
- -
अच्छे दिन का
इंतज़ार ख़तम
नहीं आएँगे !
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हाँ,अवस्था तो
आपत्तिजनक है,
जननी कौन ?
रविवार, 13 जनवरी 2019
शनिवार, 12 जनवरी 2019
बुधवार, 9 जनवरी 2019
बुधवार, 19 दिसंबर 2018
मंगलवार, 18 दिसंबर 2018
मंगलवार, 11 दिसंबर 2018
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