गुरुवार, 26 मई 2016

किरन बेदी ले.राज्यपाल बनीं, तो मेरे दिमाग़ में यह ख्याल कौंधा । लखनऊ की प्रो रुपरेखा वर्मा को किसी राज्य का राज्यपाल या LG बनाया जाय । वह विश्वविद्यालय की उपकुलपति पद से निवृत्त हैं, और सामाजिक कार्य क्षेत्र में सक्रिय । योग्यता, क्षमता सम्पन्न तेज़ तर्रार महिला ! मैं प्रस्तावित करता हूँ । शासन से सम्बद्ध मित्र कृपया मेरा प्रस्ताव ऊपर तक पहुँचायें ।

PS March 2016

PS March 2016

Courtesy Ambrish Kumar
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14 मार्च 2016
श्री श्री के कार्यक्रम में एक महिला और पुरुष के प्रेम के सार्वजनिक इजहार से वरिष्ठ पत्रकार ' नागरिक .जी को जो संजीवनी और प्रेरणा मिली उससे उनका हौंसला बुलंद है .उन्होंने लिखा है अभी कम से कम तीस साल और जीने की इच्छा है ,अभी कौन ज्यादा उम्र हुई सिर्फ सत्तर. उनके इस जज्बे को सलाम और श्री श्री का आभार .कौन न और जीना चाहेगा इस आर्ट आफ लिविंग से.यह होता है असर .भले हम कितना भी जलें.फोटो -जनवार की वाल से साभार.
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Devendra Yadav फिर...ओशो कौन से बुरे थे।
Ugra Nath Nagrik ओशो सन्यासी भी हूँ मित्र , - स्वामी नीरव आनंद !
संजीव तिवारी गौकिन, डोकरा बबा कहय 'गुरु बनावै जान के अउ पानी पियै छान के!' तमंचा के डिमाग फेल हो गए हे गौंटिया ...

Tahira Hasan Asaram bhi to ise rah par the

Ugra Nath Nagrik आसाराम की कथनी हमारे लिए नीरस थी । अपनी करनी उन्होंने केवल अपने लिए सरस रखी ।

Ambrish Kumar आशाराम छोटे बाबा है उनसे श्री श्री की तुलना ठीक नहीं वे जेल में है और श्री श्री सर्वोच्च अदालत को सीधी चुनौती देते है और पीएम से लेकर गृह मंत्री उनके आर्ट आफ लिविंग का हिस्सा बनते हैं.
Jail jane se pahle unke bhi bade bade chale the
Sushil Kaul Ambrish इसको Art of Living कहते है

Harishankar Shahi सर नागरिक जी वरिष्ठ पत्रकार हैं,,, इस तथ्य से अंजान था, चूंकि कोई परिचय नहीं है, लेकिन उनके बहुत से परिचितों से सुना है की वो सरकारी कर्मी थे.... खैर यह टिप्पणी विषय से इतर है....
इतर सही, जानकारी सही है । नौकरी में था भी, नहीं भी था । पत्रकारिता में हूँ भी, नही भी हूँ ।
Ambrish Kumar जब हम पत्रकारिता में नहीं आये थे तब वे प्रिय संपादक अख़बार निकालते थे और संपादक थे.

Nagendra Pratap नागरिक जी वरिष्ठ ही नहीं क्रॉनिक पत्रकार हैं। हम सबसे पहले के। वैसे वे "उग्र" भी हैं सो इतनी शालीनता से सिर्फ 30 साल और के लिए तैयार हो जायेंगे इस पर मुझे संदेह है। Ambrish Kumar जी फिर से तस्दीक कर लें। 

Ugra Nath Nagrik आकांक्षा सार्वजनिक कर दी गयी है, वह भी भरोसेमन्द पत्रकार द्वारा, तो जीने का प्रबन्ध हुआ समझो । प्रियतमा " प्रिय संपादक" पुनः मेरी मेज पर आ बैठी, यह क्या कम है ? smile emoticon

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