बुधवार, 26 दिसंबर 2012

मेरी क्रिसमस


[व्यक्तिगत ]
* मुझे दूसरों के गलतियों की सजा भुगतने में बड़ा आनंद आता है | भुगता ही जीवन भर भाई , बेटा - बेटी अधिकारी - मातहत की गलतियों की सजा | अब समझ में आया आज मुझे ईसा मसीह क्यों ज्यादा याद आये ! आज मेरी क्रिसमस के दिन अपने परिवार द्वारा किये गए वाहन दुर्घटना की सजा मुझे भुगतनी पड़ी | लेकिन मैं मनुष्य हूँ न ? ईश्वर की औलाद नहीं | इसलिए दुखी हूँ थोडा |

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