मंगलवार, 13 सितंबर 2011

कहना पड़ता है

* - Correct ways are always politically incorrect.
* - आदमी समाज से नहीं , साहित्य से बनता है ।

* - बिना गियर बदले तो गाडी भी नहीं चलती , फिर वैचारिक गाडी ही कैसे चलेगी ।

* - बोल अनोख बोलते लोग ,
दो कौड़ी के होते लोग । #

* - कोई परहित कहाँ सोचता ,
सबको अपनी -अपनी चिंता । #

* - कभी कभी मन सूफी होता है ,
कभी कभी मन्सूबी होता है;
जो मिल जाए खा लेता है कभी कभी,
कभी कभी मन स्वादीहोता है । #

* - चमड़े का काम करने से यदि कोई चमार हो जाता है , तो क्या इस डर से कोई चमड़े का काम करेगा ही नहीं ? या , क्या चमड़े का काम बंद हो जायगा ? #

* - विचार मनवाने के लिए हम कोई तलवार नहीं चला सकते । #

* - आदमी को समझने में मुझसे हमेशा गलती हो जाती है और मुझे बाद में पछताना पड़ता है । इसलिए मैंने अब यह किया है कि मैं आदमियों के चक्कर में ज्यादा पड़ता ही नहीं , भले इस से मेरा कुछ नुकसान भी होता है । #

* - सभा समारोहों में मैं अब भी जाता हूँ यद्यपि इनसे बिल्कुल अरुचि हो गयी है ।फिर भी जाता हूँ अपने धैर्य परीक्षण के लिए । लोग बोलते जाते हैं , मैं बिना बोले सुनता जाता हूँ । यह भी एक प्रकार का योग है । परीक्षा कठिन होती है और मुझे सफल होना होता है ।
एक और भी कारण है वहां जाने का । लोगों के चेहरे देखने, ज़ेहन में पुनर्जीवित करने , । पुराने लोगों के साथ बिताये दिवस याद करने के लिए ,नई पीढ़ी का जायजा लेने के लिए। #
##############

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें