मंगलवार, 1 जनवरी 2013

कहाँ गए थे


* [ कुछ नए अशआर ]

* झूठ मूठ जीवन को झूठ मूठ जीना है ,
थोडा तो सीना और ज्यादा पिरोना है |

* शेष ज़िन्दगी काटनी है अब किसी की याद में ,
किसी शिकवे में नहीं , या किसी फ़रियाद में |

* कहाँ गए थे मुझे छोड़कर ,
अब मत जाना मुझे छोड़कर |
दो दिन से भूखे प्यासे हो ,
जी पाओगे मुझे छोड़कर ?

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