उग्रनाथ'नागरिक'(1946, बस्ती) का संपूर्ण सृजनात्मक एवं संरचनात्मक संसार | अध्यात्म,धर्म और राज्य के संबंध में साहित्य,विचार,योजनाएँ एवं कार्यक्रम @
मंगलवार, 30 जनवरी 2018
आहत
धामिक भावना आहत न की जाय, यह दूसरी बात है । पहली बात यह है कि धार्मिक भावना आहत हो ही क्यों ? यह तो बड़ी उच्च और आदर्श किस्म की चीज़ होती है ? कोई कहता रहे अंट शंट, बकता रहे अंड बंड, आपसे क्या मतलब ? आप बचकर निकल जाइए ।
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