जब आप बहुत इस्लाम और मुसलमान का जाप करते हैं तो जानते हैं क्या करते हैं ? और आप जान भी नहीं पाते ।
कि इस प्रकार आप इनकी मजबूती को, इनकी ताकत को वैधता और मान्यता प्रदान करते हैं ! बल्कि और बल प्रदान करते हैं ।
इससे पता चलता है कि आप इनसे न केवल जलते या खार खाते हैं बल्कि इनसे आप डरते हैं । वरना यदि आप शक्तिशाली हो तो इनसे भला क्या डर होता इनसे? क्या डरना इनसे ?
या किसी भी मनुष्य या किसी सिद्धांत-वाद- धर्म से?
आप सचमुच अपनी आध्यात्मिक कमज़ोरी, विवशता का प्रदर्शन करते हैं । अपने विवेक बुद्धि पर भरोसा नहीं है क्या ?
तो भाई , भय,जलन, ईर्ष्या, द्वेष छोड़िए । डर के आगे ही जीत है । डर गए तो समझो मर गए ।
उग्रनाथ'नागरिक'(1946, बस्ती) का संपूर्ण सृजनात्मक एवं संरचनात्मक संसार | अध्यात्म,धर्म और राज्य के संबंध में साहित्य,विचार,योजनाएँ एवं कार्यक्रम @
बुधवार, 29 जनवरी 2020
मुस्लिम इस्लाम
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