रविवार, 17 अप्रैल 2011

महाब्राह्मण / कसाव की सजा

* महाब्राह्मण
१६/४/११ , अभी एक नाटक देखा -महाब्राह्मण | ब्राह्मणों के भीतर भेद-भाव , छुआ-छूट | मेरा यह विचार पुख्ता हुआ कि ब्राह्मणवाद जैसी कोई समस्या वस्तुतः नहीं है | हम स्वयं विषमतावादी , भेद-भाव -मूलक , उंच -नीच , श्रेष्ठता -न्यूनता के दंभ में डूबे या उस से ग्रस्त हैं , और अपनी बुराई को नाहक किसी अदृश्य ब्राह्मण वाद  के सर पर थोप कर स्वयं छुट्टी पाना चाहते हैं | जिससे हमें कुछ करना न पड़े और कोई हमें दोषी न बनाये |
और हम पाक -दामन कहलाये जाएँ | यह प्रवृत्ति हर वर्ग , जाति ,सम्प्रदाय  , धर्म , राष्ट्र में है | फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि केवल भारत का एक प्राचीन दुबला -पतला ब्राह्मण इतना ताक़तवर हो गया कि वह समूची दुनिया को अपनी स्थापना से नचाये हुए है ? और उसकी काट   मार्क्सवाद सरीखा सशक्त दर्शन और उसके समर्पित कार्यकर्त्ता भी नहीं कर पा रहे हैं ?


*कसाव की सजा
कसाव के लिए अभिनव  सजा का प्रस्ताव  |
मृत्यु  दंड प्राप्त कसाव का मामला हम मृत्यु दंड विरोधियों के लिए निर्णीत करना कठिन हो गया है , भारत की जन भावना को ध्यान में रखते हुए | फिर भी एक विकल्प है जिस से सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे | use  desh  के rajneetik  vidrohiyon  - mao  vadiyon के बीच जंगल में छोड़ दिया जाय | इस से दो बातें होंगी | या वह अपना कौशल mao vadiyon को सिखाएगा [नहीं सिखाएगा तो मार खायेगा ] , या फिर नयी rajneetik चेतना से लैस होकर अपनी प्रवृत्ति में परवर्तन लाएगा [नहीं लाएगा तो मारा जाएगा] | दोनों ही दशाओं में desh पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा | जैसे सत्यानास, वैसे सवा सत्यानास | तमाम आतंकवादियों में एक आतंकवादी और जुड़ जायेगा , बस | पर हमारा हिन्दुस्तान तो कसाव का कसाई बन ने के अपराध से तो बच जायेगा , जिसकी बड़ी आलोचना माओवादी और उनके मित्र मानव वादी जब -तब करते रहते हैं | अब वे जैसे खुद बचते हैं कसाव को भी बचाएं | अथवा जैसे खुद मरते हैं , वैसे कसाव को भी मारें | भारत राज्य क्यों अपने हाथ में खून लगाये ?##        

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