आलोच्य तो फिर भी होगा, लेकिन एक बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है, मिल ही जायेगा कलयुगी लोकतन्त्र को रामराज्य में, यदि उसकी नीति कलयुगी रामभक्त लागू कर पाए तो ।
किसी पुरोहित ने स्मरण दिलाया है, इंगित किया है कि यदि निर्भया के एक ब्राह्मण अपराधी को फाँसी दी गयी तो यह ब्रह्म हत्या होगी जो पाप होगा, इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए ।
तो चलो एक तो पहले बचे फाँसी की सज़ा से, किसी बहाने सही ।
उग्रनाथ'नागरिक'(1946, बस्ती) का संपूर्ण सृजनात्मक एवं संरचनात्मक संसार | अध्यात्म,धर्म और राज्य के संबंध में साहित्य,विचार,योजनाएँ एवं कार्यक्रम @
गुरुवार, 12 मार्च 2020
रामराज्य में
सोमवार, 9 मार्च 2020
रविवार, 8 मार्च 2020
महिला दिवस
औरतें तो आज़ाद हो जाती हैं । माँएँ कभी आज़ाद नहीं हो पातीं । ज़िम्मेदारियाँ बहुत बड़ा बंधन है । गुलामी कहिये, उन्हें कहने दीजिये ।
विकल्पहीन
थोड़े में बसर करने के सिद्धांत का कोई विकल्प नहीं दिखता । दिखेगा तो बताएँगे । हमारा तो आज़माया हुआ है । हमारे Divya Ranjan Pathak " निर्विकार" इसके साक्षात उदाहरण हैं ।
To everyone according to his need की सफलता संदिग्ध है, क्योंकि Need की कोई सीमा नहीं है । सीमा हो जाय तो मार्क्सवाद आया समझो ।
आदर प्रेम
मैं प्रेम को ही आदर समझता हूँ और आदर को ही प्रेम समझता हूँ ।
(बतर्ज़ गाँधी जी :- सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है ।☺️)
- - - उग्रनाथ
रामराज्य
रामराज्य का मतलब ब्राह्मण राज है । या फिर ब्राह्मणवादी राज्य कह लीजिए । इसमें संदेह किस बात का ? देख ही रहे हैं । योगी मोदी शाह, सब ब्राह्मण हैं । ब्राह्मण ने तो हमेशा कहा, वर्ण को परिभाषित किया कि ब्राह्मण कोई भी अपने कर्मों से बन सकता है । तो यदि गवर्नर आरिफ़ मुहम्मद साहेब ब्राह्मण बन जायँ तो किमाश्चर्यम ?
शनिवार, 7 मार्च 2020
शुक्रवार, 6 मार्च 2020
गुरुवार, 5 मार्च 2020
तेरे लिए जीना
जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं वह जल्दी मर जाते हैं । जो थोड़ा दूसरों का भी ख़्याल करते हैं वह ज़्यादा उम्र जीते हैं । ऐसा मेरा काल्पनिक अनुभव है ।
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020
बुधवार, 26 फ़रवरी 2020
राज्य जाय
भारत देश को सरकारी तंत्र से बाहर निकालना है । इसलिए मैं मानव हितैषी होकर भी कल्याणकारी राज्य के दंद फंद को हजम नहीं करता, क्योंकि इसी तरीके से राज्य अपना तख़्त पुख़्ता करता है, और फिर शोषण पर उतारू । तब मेरी नज़र राज्य के विलोपन, withering away of the state की ओर जाता है । यह न हो तो भी राज्य जितना भी कमजोर हो उतना ही अच्छा । इसीलिए मैं अरविंद केजरीवाल का भी ज़्यादा क़ायल नहीं हूँ!
एक सही वर्तनी हो तुम
कवितानुमा?
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तुम मेरे नाम की
वर्तनी ग़लत लिख दो,
मेरे नाम के उच्चारण को
गालियों, तद्भव शब्दों से भर दो !
मेरे नाम की वर्तनी
सुगंधित हो जाएगी,
मेरे नाम का उच्चारण
महक उठेगा,
लेकिन तुम कोई नाम
लिखो तो सही,
कुछ बोलो तो सही !
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(उग्रनाथ)
घर से मस्जिद है बहुत दूर
बाबरी मस्जिद के लिए ज़मीन अयोध्या शहर से बहुत दूर दी गयी ।
कहते हैं बेग़म हज़रत महल ने पुराना हनुमान मंदिर अलीगंज के लिए भी ज़मीन दी थी । तब तो यह भी लखनऊ शहर से बहुत बाहर रहा होगा ?
सोचता हूँ , क्या यह सही हुआ ? क्या यह ज़रूरी था ? इससे सद्भावना बढ़ी, या धार्मिक अंधता और उन्माद ?
बशिष्ठ नगर
अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी बनाने के बाद अब हमारे नाम को भी बदलने की तैयारी हो रही है । हम अहसास बस्तवी अब अहसास बशिष्ठी हो जायँगे ।
लेकिन अच्छा हुआ हम पहले ही बस्ती से कटकर सिद्धार्थनागरी हो चुके थे । ☺️
विज्ञान चेतना अवरोध
Scientific Temperament
भारत में वैज्ञानिक चेतना का विकास न हो पाने, इसके अवरुद्ध होने का एक कारण मेरी समझ में आता है । वह है अस्पतालों की दुर्दशा, चिकित्सा के क्षेत्र का व्यापारीकरण, डॉक्टरी पेशे के व्यवसायीकरण, और डॉक्टरों का हृदयहीन छवि समाज में व्याप्त होना ।
साधारण जनता के सामने डॉक्टरों की जमात विज्ञान और वैज्ञानिकता की प्रतिनिधि के रूप में सामने आती है । और इन ख़ुदा और भगवान माने जाने वाले जनसेवकों की यह स्तरहीनता उन्हें विज्ञान विमुख करने में बड़ी भूमिका निभाती है । ऐसा मेरा आकलन, estimation है ।
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020
वैकल्पिक बाबर
बाबरी मस्जिद नाम कोई रखेगा थोड़े ही । ख़ुद हिन्दू ही अपने आप इसे पुकारने लगेंगे । ऐसे कि यह बाबरी मस्जिद के विकल्प में बना है । यह गलती तो सुप्रीम कोर्ट ने की । मुस्लिम पक्ष ने इसकी demand तो की नहीं थी । मुकदमे पर न्याय के अनुसार इसे वहीं मिलना था । न्याय न मिला तो वैकल्पिक जमीन तो उन्होंने माँगी न थी । नहीं देनी चाहिए थी ।
सोमवार, 24 फ़रवरी 2020
बाबर को श्रेय
क्या तो विडंबना का चिंतन है या चिंतन की विडंबना ? कहना पड़ता है कि यदि बाबर नेअयोध्या में तथाकथित राम मंदिर तोड़कर मस्जिद न बनवाई होती तो क्या एक काल्पनिक नायक चरित्र, साहित्यिक आवतारिक पात्र का इतना बड़ा, ऐसा भव्य मंदिर बन पाता ?
कहीं भी तो इनका कोई आराध्य मंदिर परंपरा में दृष्टिगोचर नहीं है । तो क्या मंदिर निर्माण का मूल श्रेय बाबर को दिया जाय ? कैसी विडंबना है, न हाँ कहते बनता है, न ना कहते बनता है । 😢