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शनिवार, 11 अप्रैल 2020

अकर्म

मैंने काम यह किया कि मैंने कुछ नहीं किया । (अकर्म?☺️)
मैंने अपने परिवार को अपनी ओर मोड़ने की कोई कोशिश नहीं की, बच्चों को कोई दिशानिर्देश नहीं दिया, मित्रों को विचारधारा नहीं पकड़ाई ।
सब उन्होंने अपने मन से अपना काम किया ।
और मेरा काम हो गया, होता गया ।
मैंने कुछ नहीं किया - यही मैंने काम किया ।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

प्रचार बेकार

स्थिति तो आशावादी है, इसलिए मैं निराश नहीं हूँ । लेकिन निराशावादी बात जरूर कह रहा हूँ ।-
अब हमें नास्तिकता के प्रचार की ज़रूरत नहीं है। इसका प्रचार तो नन्हे से, ईश्वर की तरह से ही 'न दिखने वाले वायरस' ने सशक्त तरीके से कर दिया है । जिसके पास तनिक भी बुद्धि और अनुभव क्षमता हो वह बड़ी सरलता से नास्तिकता को प्राप्त हो सकता है, यदि वह चाहे । इसलिये मैं तो इस group को बंद करने की सलाह दूँगा । क्योंकि अब इतने साक्षात उदाहरण के बाद भी कोई नास्तिक न हो जाय (और होंगे भी नहीं), तो हमारे प्रचार प्रसार और कहने से भी नहीं होंगे । फिर आवश्यकता क्या है ऐसा निष्फल प्रयास करने की? हमें अब भगत सिंह, राहुल सांकृत्यायन और प्राचीन लोकायतन से क्षमा माँग लेनी चाहिए । प्रणाम गुरुदेव !
बहरहाल, मैं व्यक्तिगत तो यह group छोड़ने का मन बना चुका हूँ । - (उग्रनाथ नागरिक)

बुधवार, 25 मार्च 2020

Gonzo

I did adopt this style of journalism cas it suits my non stop haphazard writing. The writing of Hunter S. Thomoson. Credit goes to Bill Cardoso for papularising it. Below a screenshot about it from google.
(Ugra Nath)
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Gonzo journalism is a style of journalism that is written without claims of objectivity, often including the reporter as part of the story via a first-person narrative. The word "gonzo" is believed to have been first used in 1970 to describe an article by Hunter S. Thompson, who later popularized the style.

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

बशिष्ठ नगर

अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी बनाने के बाद अब हमारे नाम को भी बदलने की तैयारी हो रही है । हम अहसास बस्तवी अब अहसास बशिष्ठी हो जायँगे ।
लेकिन अच्छा हुआ हम पहले ही बस्ती से कटकर सिद्धार्थनागरी हो चुके थे । ☺️

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

महरूम

मुझे इस इस बात का मलाल है कि मुझे अच्छे आदमियों का साथ नहीं मिला, उनसे संपर्क नहीं हुआ, उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला । तो, शायद मैं ही अच्छा आदमी नहीं था ।

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

दुनियावादी, दुनियादार नहीं

दुनियावादी (Secular, इहलौकिक, भौतिक- सांसारिक) तो मैं खूब हूँ । लेकिन दुनियादारी से बहुत दूर ! और चालाकी से तो मुझे सख़्त नफ़रत है ।

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

असफलता

आप मेरी बात पर क्या चौंकेंगे नहीं, यदि मैं आपसे कहूँ कि मुझे अपनी असफलता से प्रेम है ? बल्कि मुझे इस पर नाज़ भी है । क्योंकि मैंने काम बहुत किया इसके सहारे । बहुत लिख डाला मैंने अपने मन की बातें । सफलता असफलता के द्वंद्व ने मुझे मेरे काम से रोका नहीं, कोई विघ्न व्यवधान नहीं डाला । सफलता की कामना ही मेरे मन में नहीं उपजी । मैं निश्चिंत चलता रहा, बेखबर, निर्द्वंन्द्व हाथ पाँव चलाता रहा । जब तक जिया सक्रिय रहा ।

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

स्वास्थ्य

मेरे स्वास्थ्य का राज़ (सम्भवतः) यह रहा, कि मैंने कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं ।☺️

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

गुनगुनी धूप

एक पखवारे से मैं अंदर अंदर बड़े अवसाद में हूँ । पता नहीं कब तक रहूँगा । एक 7 साल की बच्ची ने अब बड़ी होकर, तब 81 वर्ष के बुजुर्ग लगभग विक्षिप्त हुए अति सम्मानित महा जनकवि बाबा नागार्जुन पर जो दुर्व्यवहार का आरोप लगाया उससे मैं आहत हुआ । यह दुर्घटना मेरे दिमाग़ से उतर ही नहीं रही है । कौन सही कौन गलत तय ही नहीं कर पा रहा हूँ । समझ में नहीं आता मैं बाबा की तरफ से शर्मिंदगी महसूस करूँ, उस पाप का पश्चाताप करूँ, या साहित्य-संस्कृति विभाग की ओर से आरोपकर्ता के ऊपर मानहानि का मुकदमा ठोंकूँ ? बाबा के उत्तराधिकारी सारे नर नारी कवि लेखक साहित्यकारों की चुप्पी अप्रत्याशित है ।
अनिर्णय और क्षोभ की दशा में मैंने दो काम किये । एक तो बाबा की नज़ीर देकर मैंने इधर मृत्युदण्ड प्राप्त अपराधियों के लिए क्षमादान की माँग की । (जब बाबा जैसी हस्ती ऐसा करने पर विवश हुई तो उन लफंगों की क्या सांस्कृतिक हैसियत?)
दूसरे - फेसबुक पर किसी महिला मित्र के पोस्ट को Like/Comment, प्रतिक्रिया बिल्कुल बन्द। इनसे दूर रहने में ही अपनी इज्ज़त की सुरक्षा है । इनके प्रति मेरी दृष्टि तीखी हो गयी है । Sorry, Very sorry!😢

गुरुवार, 1 मार्च 2018

रविवार, 28 जनवरी 2018

टाँग

हम किसी के काम में टाँग नहीं अड़ाते । हम केवल अपने काम को काम समझते हैं ।

सुनना

मुझमें तमाम कमियाँ हैं । लेकिन एक अच्छाई तो है । कि मैं सबकी बात धैर्य से सुनता हूँ । और विचारार्थ अपने पास रख लेता हूँ ।

सोमवार, 14 मार्च 2016

+श्री श्री रविशंकर , पत्रकार अम्बरीश कुमार रामेन्द्र जेनवार और मै !



श्री श्री के दिल्ली में  हुए  कार्यक्रम के  सम्बन्ध में रोचक संवाद !

Courtesy Ambrish Kumar
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14 मार्च 2016
श्री श्री के कार्यक्रम में एक महिला और पुरुष के प्रेम के सार्वजनिक इजहार से वरिष्ठ पत्रकार ' नागरिक .जी को जो संजीवनी और प्रेरणा मिली उससे उनका हौंसला बुलंद है .उन्होंने लिखा है अभी कम से कम तीस साल और जीने की इच्छा है ,अभी कौन ज्यादा उम्र हुई सिर्फ सत्तर. उनके इस जज्बे को सलाम और श्री श्री का आभार .कौन न और जीना चाहेगा इस आर्ट आफ लिविंग से.यह होता है असर .भले हम कितना भी जलें.फोटो -जनवार की वाल से साभार.
s
Devendra Yadav फिर...ओशो कौन से बुरे थे।
Ugra Nath Nagrik ओशो सन्यासी भी हूँ मित्र , - स्वामी नीरव आनंद !
संजीव तिवारी गौकिन, डोकरा बबा कहय 'गुरु बनावै जान के अउ पानी पियै छान के!' तमंचा के डिमाग फेल हो गए हे गौंटिया ...

Tahira Hasan Asaram bhi to ise rah par the

Ugra Nath Nagrik आसाराम की कथनी हमारे लिए नीरस थी । अपनी करनी उन्होंने केवल अपने लिए सरस रखी ।

Ambrish Kumar आशाराम छोटे बाबा है उनसे श्री श्री की तुलना ठीक नहीं वे जेल में है और श्री श्री सर्वोच्च अदालत को सीधी चुनौती देते है और पीएम से लेकर गृह मंत्री उनके आर्ट आफ लिविंग का हिस्सा बनते हैं.
Jail jane se pahle unke bhi bade bade chale the
Sushil Kaul Ambrish इसको Art of Living कहते है

Harishankar Shahi सर नागरिक जी वरिष्ठ पत्रकार हैं,,, इस तथ्य से अंजान था, चूंकि कोई परिचय नहीं है, लेकिन उनके बहुत से परिचितों से सुना है की वो सरकारी कर्मी थे.... खैर यह टिप्पणी विषय से इतर है....
इतर सही, जानकारी सही है । नौकरी में था भी, नहीं भी था । पत्रकारिता में हूँ भी, नही भी हूँ ।
Ambrish Kumar जब हम पत्रकारिता में नहीं आये थे तब वे प्रिय संपादक अख़बार निकालते थे और संपादक थे.

Nagendra Pratap नागरिक जी वरिष्ठ ही नहीं क्रॉनिक पत्रकार हैं। हम सबसे पहले के। वैसे वे "उग्र" भी हैं सो इतनी शालीनता से सिर्फ 30 साल और के लिए तैयार हो जायेंगे इस पर मुझे संदेह है। Ambrish Kumar जी फिर से तस्दीक कर लें। 

Ugra Nath Nagrik आकांक्षा सार्वजनिक कर दी गयी है, वह भी भरोसेमन्द पत्रकार द्वारा, तो जीने का प्रबन्ध हुआ समझो । प्रियतमा " प्रिय संपादक" पुनः मेरी मेज पर आ बैठी, यह क्या कम है ? smile emoticon

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    पूर्व पीठिका = 
    Ramendra Jenwar का फोटो पोस्ट | Art of Living पर मेरी टिप्पणी :
    Ugra Nath Nagrik मैं भी जियूँगा । मृत्यु को पास फटकने न दूँगा । अभी 70 ही तो है ! तो 30 तो कम से कम !

    Ramendra Jenwar खाली जीने से क्या होगा नागरिक जी...फ़ोटो वाली आर्ट आफ लिविँग के साथ जिएँ तब तो असली जीना होगा...
    Ugra Nath Nagrik तभी तो smile emoticon जीने की कला की शर्त ही वही है
    १५ मार्च २०१६ Cpd from fb .

रविवार, 4 अगस्त 2013

Intrduction to Hindi Samay

नाम -  उग्रनाथ " नागरिक "
जन्म - 9 सितम्बर 1946
विधाएँ - चिन्तन एवं कथन , वह जिस भी विधा में ठीक बैठ जाये | मूल उत्स - कविता
प्रकाशन - " प्रिय सम्पादक " मासिक का 1984 से 38 वर्षों तक
सम्पादन-प्रकाशन | अतिरिक्त :-
             (क) हस्तलिखित A - 4 आकार सतत लेखन संग्रह = 20 अदद
             (ख) कविता संग्रह - 1 - कफन और अन्य कविताएँ 2 - पुनश्च 3 -
पांच सात पांच 4 - दूसरी कड़ी
                                  5 - बढ़िया है 6 - तिस पर भी 7 - बस
क्षण भर 8 - मेरा अंतर्मन मेरी कविताएँ                       9 - सुबह
की पहली चाय 10 - साधारण स्थितियों की कविताएँ 11 - कविता के तौर पर 12 -
ये कैसी कविताएँ 13 - ७०६ हाइकु 14 - जो चाहो उजियार 15 - आगे और हैं
कविताएँ 16 - आमी नदी
              (ग) डायरी / विचार संग्रह - 1 - बिना नेकर का आदमी 2 -
धारा प्रवाह 3 - रैन्डम रबल
                                               4 - मानुषेर मुंशी 5 -
बुद्धिविहीना
               (घ) कथन संग्रह = सुनो भारत
               (ड०) लेख संग्रह  = तेरह पन्ने
               प्रकाश्य = 1- हरी धनिया की पत्ती (कविता) 2 - लघुत्तमा (कविता)
               कुल 45 , लेकिन इन्हें प्रकाशित कहना अनुचित होगा क्योंकि
इन्हें मैंने स्वयं प्रकाशित किया |

सम्मान - जो भी हैं, मैं उनका उल्लेख नहीं कर सकता | अतः - " कोई नहीं " समझा जाय |

सम्प्रति - सेवानिवृत्त , स्वनियुक्त " दिनमान " कार्यकर्त्ता , फेसबुक
एवं ब्लॉग लेखनरत |

संपर्क - दिनमान काटेज, L - 5 - L / 185 , Sector - L , Aliganj ,
Lucknow - 226024 [U.P.]
          Phone - 09415160913
          Email - priyasampadak@gmail.com

Quick Reply

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

यह भी कहना


[ यह भी कहना ]
* मेरी दोस्ती कई लोगों से कायम है | क्योंकि , अव्वल तो मैं किसी से पैसे नहीं माँगता , और यदि कभी कोई इमरजेंसी आ ही गई तो शीघ्र वापस कर देता हूँ |

* मेरे बच्चों ने बड़ी तकलीफें सही हैं मेरी निर्धनता के साथ | अब वे अपने पाँव खड़े हैं , तब वे मेरे साथ क्यों तकलीफ झेलें ?

रविवार, 11 नवंबर 2012

पुराणमित्वा


मेरे कुछ नए नाम =
कमज़ोर आदमी / पुरान मितवा [ पुराणमित्वा न हि साधू सर्वम से लिया गया ]

PEN IS MY SWORD

चूँकि मैं खुद मूलतः पत्र लेखक ही रहा हूँ , इसलिए " उपदेसक " वाली बात हूबहू मैं चंचल जी जैसी के विक्रम राव जी के "PEN IS MY SWORD " पुस्तक के विमोचन के अवसर पर गत नौ तारिख को प्रेस  क्लब में उठाना चाहता था | आमंत्रित भी था पर वक्ताओं की बहुलता के कारण बात नहीं कर सका | तथापि यह मुद्दा बहुत जायज़ है | 11/11/12

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

मेरी रचनाएँ मेरे ब्लॉग पर

फेस बुक के मित्रो को सूचित करना है की मेरी सारी रचनाएँ मेरे ब्लॉग nagriknavneet.blogspot.com पर सुरक्षित हैं । विभिन्न विषय इन शीर्षकों के अंतर्गत हैं - उवाच संग्रह ,कथा विषय , कवितानुमा , गड़बड़ शैली , घालमेल , जनांदोलन , धर्म - कर्म , पूरा आलेख , बिंदु - योजना , विचार शिला , हाइकु किताब , और - व्यक्तिगत सूचना ।