हर आदमी को जीने का हक़ है, और उन्हें ज़िंदगी के समान मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी हमारी है ।
(नागरिक उवाच)
उग्रनाथ'नागरिक'(1946, बस्ती) का संपूर्ण सृजनात्मक एवं संरचनात्मक संसार | अध्यात्म,धर्म और राज्य के संबंध में साहित्य,विचार,योजनाएँ एवं कार्यक्रम @
शनिवार, 22 फ़रवरी 2020
जीना
शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020
हिंसा में करुणा ?
हिंसा में भी दया, करुणा की आवश्यकता होती है :-
घर चूहों से परेशान था । दुकानदार की सलाह से चिपकने वाली चटाई ले आया । सुबह दो चूहे चिपके मरे पड़े मिले । फेंकने गया तो उनकी छटपटाहट की कल्पना से सिहर गया । यह तकलीफदेह हिंसा थी । एक हिंसा वह भी होती यदि उन्हें चूहेदानी में फंसाकर बाहर छोड़ता । यह हिंसा दयापूर्ण, करुणामय होती । ऐसा ख़्याल आया । यह नहीं कि हिंसा तो दोनो ही है, क्या फ़र्क़ पड़ता है ।
ऐसा ही कुछ फ़र्क़ जानवरों को जिबह करने में भी है । बयान और समीक्षा करना कठिन है मेरे लिए ।
महरूम
मुझे इस इस बात का मलाल है कि मुझे अच्छे आदमियों का साथ नहीं मिला, उनसे संपर्क नहीं हुआ, उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला । तो, शायद मैं ही अच्छा आदमी नहीं था ।
गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020
मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020
अनुसरण
यदि हमारे पास पर्याप्त मस्तिष्क नहीं है, और ज़ाहिर सी बात है कि सबके पास नहीं होती, तो हमें किसी का अनुसरण करना पड़ता है । करना ही चाहिए । सिद्धांतविहीन जीवन नहीं जीना चाहिए ।
हिन्दू राष्ट्र
हमें यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है । बल्कि इसमें तो हमको ही आसानी है । हम निर्द्वन्द्व हो जायेंगे जो कि हम तमाम धर्मों के बीच नहीं हो पा रहे हैं । क्योंकि तब हम लेकिन केवल हिंदू राष्ट्र राज्य धर्म और संस्कृति की ही आलोचना धड़ल्ले से कर सकेंगे, किन्हीं अन्य धर्मों, मजहबों, संस्कृतियों की नहीं (हमें उनसे प्रयोजन ही क्या है हिन्दू देश में ) ? भारत के हिंदू राष्ट्र होते ही हम इसका अधिकारी हो जाएंगे और हिंदू इसका पात्र हो जाएगा कि वह हमारी आलोचना का शिकार बने । है न हमारी बात सही यदि हम मान लें कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है ? लेकिन तब फिर यह न कहिएगा कि "उनकी देखो" / "उनको कुछ नहीं कहते" । अरे भाई, अब उनकी क्या औकात ? तुम्हीं बोओ तुम्हीं काटो, तुम्हीं झेलो । बो तो रहे हो बबूल के पेड़ !😢
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
वेश्यावृत्ति
वेश्यावृत्ति का कोई विकल्प दिख नहीं रहा है ।
या, इसे यूँ कहें कि :-
वेश्यावृत्ति से निज़ात (मुक्ति, छुटकारा) का कोई उपाय नहीं दिख रहा ।
रविवार, 16 फ़रवरी 2020
शनिवार, 15 फ़रवरी 2020
दुनियावादी, दुनियादार नहीं
दुनियावादी (Secular, इहलौकिक, भौतिक- सांसारिक) तो मैं खूब हूँ । लेकिन दुनियादारी से बहुत दूर ! और चालाकी से तो मुझे सख़्त नफ़रत है ।
गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020
नास्तिक, भला आदमी
मुझे फ़ख्र है कि, बन भले नहीं पाया, लेकिन एक अच्छा मनुष्य बनने की कामना में मैं नास्तिक बना !👍👌💐
Rid of reigion
Valentine !👍WE ALL,
Everybody Loves Everybody, चुनांचे,
We get rid of our caste, creed, religion, masculinity, nationality etc,
The bondages of Humanity. ☺️💐
Valentine
Good gesture ☺️. Valentine, new year, chrismas का धूमधाम से मनाया जाना यह show करता है कि मनुष्य उत्सव के लिए धर्म देश etc की कोई सीमा नहीं देखता । अभी घण्टा भर पहले मैं विचार कर रहा था कि हम सेकुलर नास्तिकों को भारत में वह उत्सव मनाना चाहिए जो हमारे नहीं हैं, मतलब देश के प्रमुख धर्मों के नहीं हैं । हमें हिन्दू मुस्लिम त्योहारों के बजाय ईसाई उत्सव मनाने चाहिए ।
मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020
अरब में मंदिर
भैये, अब आप लोग बस मंदिर बनाने का ठेका लो । अरब में, अमरीका में, अयोध्या में, और दुनिया भर में । यह राज्य चलाने का हौसला छोड़ दो । तुमसे न होगा, तुम्हारे बस का नहीं यह काम ।
रविवार, 9 फ़रवरी 2020
असफलता
आप मेरी बात पर क्या चौंकेंगे नहीं, यदि मैं आपसे कहूँ कि मुझे अपनी असफलता से प्रेम है ? बल्कि मुझे इस पर नाज़ भी है । क्योंकि मैंने काम बहुत किया इसके सहारे । बहुत लिख डाला मैंने अपने मन की बातें । सफलता असफलता के द्वंद्व ने मुझे मेरे काम से रोका नहीं, कोई विघ्न व्यवधान नहीं डाला । सफलता की कामना ही मेरे मन में नहीं उपजी । मैं निश्चिंत चलता रहा, बेखबर, निर्द्वंन्द्व हाथ पाँव चलाता रहा । जब तक जिया सक्रिय रहा ।