रविवार, 9 फ़रवरी 2020

मैं कहाँ

WE are our nationhood defined लिखकर उन्होंने तो अपनी राष्ट्रीयता define या पक्की तो क्या, राष्ट्र पर कब्ज़ा ही कर लिया । अब हमसे पूछते हैं तुम कहाँ के रहने वाले हो ?

चिंता विषय

Points to ponder :-
* बाबर, सावरकर में इतनी साहित्यिक- ध्वन्यात्मक समानता क्यों है ?

* हमने लोकतन्त्र का चुनाव किया था । आज़ादी के बाद लोकतन्त्र चुना था । हमें लोकतन्त्र ही चाहिए । Is the state succeeding or failing to provide ? सड़क पर सामान्यतः चलने, बोलने, लिखने पढ़ने में डर क्यों लगता है ? हम विश्वप्रसिद्ध दर्शन की किताबें घर में क्यों नहीं रख सकते ?

* संघ (भेंड़-बकरी झुंड) को एक intense प्रहार, इस पर करारा वार होना चाहिए, यदि कोई हिंदुत्व और हिन्दू श्रेष्ठता को बचाना, सभ्य हिन्दू राज्य को कामयाब करना चाहता है । यह तो भाई, मुल्क को जंगली बना रहे हैं । क्या यह शोक और चिंता की बात नहीं है ?😢

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

नाराज़

मैं नाराज हूँ
सत्ता के पुलिसिया
व्यवहार से !😢

नीति विहीन

यह बात मुसलमान तो कहेगा नहीं । तो इसे यदि हम शूद्र, शुद्ध, श्रेष्ठ हिन्दू न कहेंगे तो कौन कहेगा ! - -  कि सनातनी पाखण्डी हिंदुओं की न कोई नीति है, न नियम, न नैतिकता । यह कुछ भी अच्छे से अच्छा, बुरा से बुरा कर सकते हैं । या कुछ भी नहीं कर सकते हैं (अकर्म)।
कुछ भी, लेकिन किसी सिद्धांत के अधीन नहीं ।
तो फिर इसके राज्य का क्या रोना? कैसी शिकवा, क्या शिकायत ?

Individualism

Idea:-
Individualism / Individualist
*अकेला आदमी जो कर/ बन सकता है ।
*अकेले अकेले एकलव्य जन ।
*आदमी के अंदर का असल आदमी, जो हर दूसरे आदमी से अलग/भिन्न है ।

प्रार्थना

किसी ने पूछा - क्या तुम सचमुच ईश्वर की प्रार्थना नहीं करोगे ?
मैंने कहा - क्यों नहीं ? क्यों नहीं करूँगा ? मेरी मजाल कि मैं ईश्वर की प्रार्थना न करूँ ? - -
- -  लेकिन अपने लिए नहीं । आपके पुत्र- पुत्री, परिवार की खैरियत के लिए ज़रूर ईश्वर से दुआ करूँगा ।
(उग्रनाथ नागरिक)

वक़्त खराब

सर न उठा
दब-दबाकर जी
वक़्त खराब ।

गुस्सा

मैं गुस्सा जल्दी
हो जाता हूँ, लेकिन
खुश देर से ।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

स्वास्थ्य

मेरे स्वास्थ्य का राज़ (सम्भवतः) यह रहा, कि मैंने कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं ।☺️

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

आग मूते हैं

देशद्रोही था,
अ-नागरिक हुआ
तो क्या अचंभा !
- - -   
आग मूते हैं
आख़िर तो मरेंगे
सारे के सारे !

All मुस्लिम

क्या अद्भुत विडंबना है ! या दुर्भाग्य कहें भारत वर्ष का कि इसकी सारी नागरिकता मुसलमान से जुड़ गई है ।
हिंदू का आशय क्या?  एंटी मुसलमान अब हिंदू की परिभाषा हो गई है, मुसलमान/इस्लाम की मुख़ालिफ़त हिंदुत्व हो गया है । Pro मुसलमान या Non practicing मुसलमान नाम हो गया है लोकतन्त्र समर्थक सेक्युलर जनसंख्या का (जिन्हें अर्बन नक्सल भी कहते हैं उपरोक्त हिन्दू)। और जो पैदाइशी मुसलमान हैं वह तो मुसलमान हैं ही । आशय यह कि भारत के किसी भी नागरिक (राजनीतिक मनुष्य) की पहचान मुस्लिम suffix/prefix OR anti/pro- मुस्लिम के बग़ैर पूरी नहीं होती । 😢

जीवन दान

लगे हाथ बाबरी ध्वंस के अपराधियों को भी छुटकारा दिला दें, गद्दी जाने से पहले । साध्वी को तो अभी लम्बी उम्र जीनी है, लेकिन बेचारे आडवाणी जी तो चैन से अंतिम साँस ले पाएँ !😢

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

मज़ाक

वह मुझसे मज़ाक़ करता है
मैं उससे मज़ाक़ करता है,
उसने मुझे दुनिया में भेजा
मैं उसे भी खींच लाया । ☺️

खुला आसमान

धीरे धीरे खुल रहा है आसमान,
सूर्य निकलेगा तो चाँदनी होगी ।

आया नहीं

जिसके लिए
इतनी तैयारी की,
आया ही नहीं ।

क्रांतिकारी भजन ?

क्रांतिकारी भजन ?
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परभू के गुन गाते चलो,
ईंट से ईंट बजाते चलो । ☺️👍

गांधी को नहीं मारा

मान गए । ज़रूर होंगे मुसलमान जालिम । ज़रूर किया हो सकता है इन्होंने ज़बरन धर्मांतरण कभी पूर्व में ।
लेकिन इन्होंने कभी गाँधी को नहीं मारा । किसी गांधी को नहीं मारा । सरहदी गांधी को भी नहीं । अब्दुल कलाम को कुछ नहीं कहा । और अभी भी मोहम्मद आरिफ़, शाहनवाज़, तारिक फ़तह को कुछ नहीं कह रहे हैं । कोई अपशब्द नहीं । तो, इससे क्या निष्कर्ष निकाला जाय ?
कोई अपवाद हो तो बताएं । मैं अपनी धारणा बदल लूँगा ।
(गांधी बलिदान दिवस पर विशेष)