रविवार, 7 जनवरी 2018

निर्जन

जनसंख्या तो खूब है । आदमियों की कमी है ।

स्मारक

मैंने कहा था
मत बनाओ विजय स्तम्भ
मीनारें और बुर्ज
ये तुम्हें सालेंगी,
या उन्हें चिढ़ाएँगी
उकसायेंगी बदला लेने को
या पुनः करने को अपमानित
उन्हें जो भूलना चाहते हैं घाव
अपना दम्भ मत याद करो
तुम चुनौतियों से घिर जाओगे
जीत नहीं पाओगे
हार जाओगे
अब हारना हराना छोड़ो
दो रोटी दो धोती का जीवन जियो ।
मत रखो तस्वीरें पुरखों की घर में
बीत चुके गुरुओं, भगवानों की
अब कोई ज़रूरत नहीं इनकी
इतिहास से अब मुक्ति लो
देखो, बाहर चिड़िया बैठी है
चोंच फैलाये और तुम्हारे बच्चे ।

शनिवार, 6 जनवरी 2018

साम्यवाद

ईश्वर नहीं तो आदमी तो है ? और आदमी क्या ईश्वर से कुछ कम आततायी है ? बहुत दुष्ट है यह भी तभी तो इसने अपने यथानुसार ईश्वर बनाये । इसलिए इस मनुष्य की पूरी, अच्छे से खबर रखनी पड़ेगी । मानव विज्ञान , सभ्यता का विकास और साम्यवाद की समझ बनानी पड़ेगी । खाली नास्तिकता से क्या काम चलेगा ।

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

सोमवार, 1 जनवरी 2018

नास्तिक को मज़ा

नास्तिकों को मज़ा क्यों आता है अपने को नास्तिक, Atheist कहने में ? जबकि इसके और भी लगभग समानार्थी तमाम आयाम हैं । Secular तो है ही, Non-theist, Anti-theist, Agnostic, Rationalism, Freethought, Radical Humanism, etc.और इनमें से भी बारीक अंतर वाली कई विचारधाराएँ ? सबसे प्रमुख sect Humanism तो Atheists के इस ईश्वर विरोधी रुख पर कुछ खफ़ा भी होता है । जानने की बात है कि humanism, मानववाद (कुछ इसे मानवतावाद कहना prefer करते हैं फिर भी यह Humanitarianism को छूता हुआ भी उससे अलग है) तो इन सारी विचारधाराओं का माई बाप, स्रोत संरक्षक और उत्स, initiative है । मतलब, मनुष्य (Human being) जिसके चिंतन और व्यवहार का केंद्र हो, कोई Supernatural God वगैरह नहीं । वह मानववाद है । और यही सभी सिद्धांतों के मूल में है । फर्क तो आगे चलकर होता है विशेष बातों पर । मानववाद आस्तिकता और धर्म का सकल विरोध न करके अंधविश्वास, जड़ता-कठमुल्लापन और परलोकआश्रिता को मना करता है, मनुष्यों में प्रेम सौहार्द्र का विशेष पक्षधर होता है। नास्तिक सारे पराविचार, पराशक्तियों को समूल, सिरे से नकारते हैं, इसलिए वह तिरछी नज़रों के ज़्यादा शिकार होते हैं ।

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

Plan

"नागरिकता"
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Scientific Poetic Polity
उग्रनाथ नागरिक
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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

छोड़ा

हिन्दू मुस्लिम
सबको देख लिया
जमा न कोई ।

तैरना

जब तक पानी को दोनो हाथों से पीछे ढकेलेंगे नहीं, आगे तैरेंगे कैसे ?

महामानव

हमें विशाल मनुष्य होना चाहिए । चाहे जिस नाते समझ लीजिए । महान हिन्दू होने के नाते, विराट मुस्लिम होने के नाते, विस्तृत ईसाई होने के नाते, तीक्ष्णबुद्धि दार्शनिक- वैज्ञानिक होने के , या स्वतंत्र नास्तिक होने के कारण । किसी भी वजह से हमें विशाल बुद्धि, हृदय, मस्तिष्क और व्यवहार का होना चाहिए । छोटी छोटी बातों, देवी देवताओं में उलझना नहीं चाहिए ।

जड़तामुक्ति

नास्तिकता का मतलब किसी भी आस्था पर जड़ नहीं रहना चाहिए ।
और हाँ, यही एक वाद है जिसे हर मानव परिभाषित करने का हक़दार है । फिर खण्डन का भी । अर्थात पुनर्परिभाषित करने का ।

प्रकृतेश्वर

जब कुदरत, प्रकृति, Nature है ही ईश्वरत्व से भरपूर, तो किसी और ईश्वर को क्यों मानें ?

धर्म भी

परिवर्तन
पहला कदम है
हर क्षेत्र में ।

धर्म

परिवर्तन
पहला कदम है
हर क्षेत्र में ।

Godmen

अभी तक मैं कहता रहा हूँ कि जब तक God और Godmen रहेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता । अब इसमें God worshippers भी जोड़ना पड़ रहा है ।

पढ़ो

अरे पढ़ने लिखने पर ध्यान दो । कहाँ पूजा पाठ को जाते हो !

हीन नास्तिक ?

नास्तिक का नाम लेते ही जो नास्तिक हैं भी, नास्तिकता की सत्यता से सहमत हैं वह भी, हीन भावना, पापबोध के शिकार क्यों हो जाते हैं? मानो वह खुद को खुद ही गाली दे रहे हों । मुसलमान तो ऐसा नहीं सोचते, जबकि उनके इतिहास पर गम्भीर आरोप हैं ! और यह हिन्दू नाम ? यह तो अपने आपमें एक गाली है । तब भी इस पर गर्व किया जाता है ।

चिंतक

जो चिंतक होगा वह नास्तिक होगा ही । जो अपने दिमाग़ का प्रयोग नहीं करेगा वह चिंतन क्या करेगा ?

बराबरी (संस्था)

"बराबरी"  (संस्था)
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समतावादी  :  Egalitarian
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उग्रनाथ श्रीवास्तव "नागरिक"
9415160913

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

कई दुनिया

भारत के अंतर्गत कई भारत हैं यह कहना पर्याप्त नहीं । बल्कि कहना होगा कि भारत के अंदर कई दुनिया हैं ।
एक दुनिया मोदी शाह अडवानी की है । एक दुनिया बच्चन, खानों, विराटानुष्का की है । एक दुनिया दलितों आदिवासियों, वंचितों मजलूमों की है । और सब एक दूसरे से काफी फ़र्क़ और विरोधी हित वादी हैं । विडम्बना, सब भारत में हैं ।
एक दुनिया मजदूर किसान और साथी कम्युनिस्टों की भी है ।
इन्हीं में से एक कोई अलग दुनिया मेरी भी है, लेकिन
मैं औरों की दुनिया की तुलना में अपनी ज़िन्दगी नहीं जीता ।