बुधवार, 1 अप्रैल 2020

निज़ामुद्दीन

मेरे आदरणीय बड़े भाई ! पहले आरोप तो तय कर लीजिये निज़ामुद्दीन पर । फिर बात करें ।
आपका आरोप यदि ईश्वर अल्ला पर विश्वास, धार्मिक अंधविश्वास पर है तो आपके साथ तमाम भारत है । चलिए इस दिशा में काम किया जाय । हम तो वह कर रहे हैं । नास्तिकता प्रचार ग्रुप में डेढ़ लाख सदस्य जुटे हैं।

और यदि आस्थाओं से कोई ऐतराज़ नहीं, केवल धार्मिक जमावड़े पर आपका प्रहार है, तब भी हम आपके साथ है और हैं तमाम AKSiddiqui, Asghar Mehdi सरीखे मुस्लिम बुद्धिजीवी, नाम बहुत सारे, कहाँ तक गिनाऊँ ।

लेकिन तब यह- वैष्णव देवी में "फँसे" और निज़ामुद्दीन में "छुपे" की शब्दावली नहीं चलेगी । आपको दोनो ही कि मज़ामत करनी होगी । क्या आपको याद नहीं मक्का हज ज़ियारत में भी लोग जानें दे चुके हैं? और कोरोना से कहीं अधिक बलिदान हमसे हिंदुस्तान का "तीर्थयात्रा" वायरस हर वर्ष लेता रहा है - भगदड़ में दुर्घटनाओं में । आस्थाओं की बड़ी कीमतें चुकायी और चुका रहे हैं हिन्दू और मुसलमान सभी । एक को अलग क्यों छोड़ रहे हैं यदि सचमुच न्याय दृष्टि वादी हैं आप ?
अभी ही ताज़ा एक "राम मंदिर" वायरस कुछ दशकों में कितना कहर ढाकर गया (?) क्यों भूल रहे हैं आप ? तब तो इसे आस्थाओं का देश, धर्मप्राण मुल्क बता रहे थे । तो इसी धार्मिक भावभूमि पर मुसलमान भी अपना धर्म निभा रहे हैं । उसी का कार्यक्रम था निज़ामुद्दीन । फ़र्क़ न कीजिये।
अब और अगर इससे भी कोई एतराज नहीं, आरोप केवल तकनीकी पक्ष को लेकर है - क्या सरकारी आदेश था, वीजा की वैधता, एडमिन को सूचित करने को लेकर है तो दीगर बात है । जाँच हो, होगी ही , तो दोषी नियमानुसार सज़ा पाएँगे । दोषी न हों तो बनावटी धाराओं में न फँसायें । वह राजकीय काम हॉ, हम हस्तक्षेप नहीं करते ।
कानून से अलग आपकी मानसिक शुद्धि के लिए सूचित कर दें कि पूरे प्रतिबंध के बावजूद अयोध्या में रामलला जी के मूर्ति की नए घर में shifting बड़े भावपूर्ण तरीके से किया गया, वह भी सरकार के मुखिया द्वारा जिनके जिम्मे पूरे प्रदेश का स्वास्थ्य, सुरक्षा, कानून और व्यवस्था है । क्या कहिएगा ? चूक हो गयी, आस्था की बात थी ?  निज़ामुद्दीन के प्रबंधकों से भी ऐसी चूक होने की गुंजाइश दीजिये ।
तो पहले यह तय तय कीजिये कि आपका आरोप क्या है निज़ामुद्दीन पर । फिर अपनी आस्तीन भी झाँक लीजिये ।
हमें तो किसी भी धार्मिक भावना से सहानुभूति है । क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, आस्था तो मारक यंत्र है सबके लिए । लेकिन क्या करें इन्हें धारण करने वाले मनुष्यों से तो हमें प्रेम महब्बत है !
तमाम किस्म के कोरोनाओं से लड़ना है । अज्ञान अशिक्षा बेरोजगारी तो प्रमुख थे । बीच में यह नया, Novel कोरोना आ गया । तो इससे लड़िये । सब मिलकर । इसने तो अपने खिलाफ़ पूरी दुनिया को एक कर दिया । इधर एक हम विश्व बंधुत्व वाले हैं जो हिन्दू मुसलमान किये जा रहे हैं । फिर तो जय कोरोना !

Surgery of Philosophy

मंगलवार, 31 मार्च 2020

एकलवाद की घोषणा

मैं पाला बदल रहा हूँ । बदल क्या बस नोटिस बोर्ड पर लगा रहा हूँ । I have been Individualist since long, just affirming it in black&white. Let a man do whatever he wants to do. Leave him to make his destiny himself. Who are we to guide or instruct him. Days of evangelist are over. Gods, godmen, preachers, book holders, we are not. So, set the individual being free to decide what is good or bad for their life. This may be called Individualism, I adhere to.
Only personal, individual awakening, enlightment will work. Social evils too can vanish through personal understanding. We can't give all the whole public a right move at one time. Best wishes to our brethren fellow for their free and open minds and conscience to choose the good, better and best (since today). They can ignore whatever we bark in the streets, may that be our psycho attitude, which is in our DNA. Don't mind us, choose and lead your own path.👍

आदमी अलग हो

मैं अब इस चिंता में नहीं हूँ कि हम कैसे एक हों ? मैं नास्तिक हूँ या आस्तिक, संगठित होने की चेष्टा में नहीं हूँ । नास्तिक संगठन की सोचूँगा तो आस्तिक संगठनों के बारे में सोचना पड़ेगा । उन पर नज़र डालूँ तो पाता हूँ कि वे एकताबद्ध होने में बहुत आगे निकल चुके हैं, कोई कम कोई ज़्यादा मजबूत । हम उनसे अपनी तुलना इस तराजू पर न कर पाएँगे । कर पाएँगे तो अकेले अकेले । अकेला आत्मविश्वासी नास्तिक किसी भी अकेले आध्यात्मिक आस्तिक से निपट सकता है।
इसलिए मेरा तो एजेंडा है नास्तिकों को ही नहीं, धार्मिकों को भी अकेला Individual human being, एक इकाई आदमी बनाने का । प्रत्येक नास्तिक प्रत्येक नास्तिक से/ हर आस्तिक हर आस्तिक से कैसे अलग हो, विशिष्ट और विलक्षण मनुष्य, स्वतंत्रता पूर्वक अपने जीवन का जिम्मेदार ! तभी नास्तिक सही नास्तिक हो सकेगा । तब नास्तिक आस्तिक में सामूहिक कोई भेद न होगा । क्योंकि तब तो आस्तिक भी सही आस्तिक होगा ? और हमारी कोई लड़ाई नहीं है सिवा इस उद्देश्य के कि आदमी नेक और नैतिक हो । ज़रूरी है कि हम यह काम उसी पर छोड़ दें । हम गुरुडम के शिकार न हों, यही बेहतर, कारगर रणनीति होगी ।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

प्रचार बेकार

स्थिति तो आशावादी है, इसलिए मैं निराश नहीं हूँ । लेकिन निराशावादी बात जरूर कह रहा हूँ ।-
अब हमें नास्तिकता के प्रचार की ज़रूरत नहीं है। इसका प्रचार तो नन्हे से, ईश्वर की तरह से ही 'न दिखने वाले वायरस' ने सशक्त तरीके से कर दिया है । जिसके पास तनिक भी बुद्धि और अनुभव क्षमता हो वह बड़ी सरलता से नास्तिकता को प्राप्त हो सकता है, यदि वह चाहे । इसलिये मैं तो इस group को बंद करने की सलाह दूँगा । क्योंकि अब इतने साक्षात उदाहरण के बाद भी कोई नास्तिक न हो जाय (और होंगे भी नहीं), तो हमारे प्रचार प्रसार और कहने से भी नहीं होंगे । फिर आवश्यकता क्या है ऐसा निष्फल प्रयास करने की? हमें अब भगत सिंह, राहुल सांकृत्यायन और प्राचीन लोकायतन से क्षमा माँग लेनी चाहिए । प्रणाम गुरुदेव !
बहरहाल, मैं व्यक्तिगत तो यह group छोड़ने का मन बना चुका हूँ । - (उग्रनाथ नागरिक)

बुधवार, 25 मार्च 2020

Gonzo

I did adopt this style of journalism cas it suits my non stop haphazard writing. The writing of Hunter S. Thomoson. Credit goes to Bill Cardoso for papularising it. Below a screenshot about it from google.
(Ugra Nath)
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Gonzo journalism is a style of journalism that is written without claims of objectivity, often including the reporter as part of the story via a first-person narrative. The word "gonzo" is believed to have been first used in 1970 to describe an article by Hunter S. Thompson, who later popularized the style.

मंगलवार, 24 मार्च 2020

कोरोना

भक्तो, और संघियो! आँखें खोलो! अब तो सेक्युलरवाद, धर्मनिरपेक्षता का आदर करो ! पालन करना, हृदय में धारण करना सीखो ! आदमी आदमी बराबर है । सबक खून एक है । मानव जाति एक ही प्रकृति की संतान है । अब तो मानो!
#कोरोना

ब्राह्मणवाद

ब्राह्मणवाद
तो मानव स्वभाव,
किसे धिक्कारें ?

मानव सम्मान

मैं ईश्वर अल्लाह, कृष्ण मुहम्मद की आलोचना करने से परहेज़ इसलिए नहीं करता कि ये भगवान हैं, शक्तिमान हैं, या इनसे डरता हूँ । बल्कि इसलिए कि इन्हीं नामों वाले तमाम ज़िंदा, जीवधारी मनुष्य हमारे आसपास हमारे साथ रहते  हैं - - जिनसे मैं प्रेम करता हूँ। मैं आदमी का आदर करना चाहता हूँ । 👍💐

धर्म की निंदा

कोई विचार जब धर्म बन जाये तो उससे दूरी रखना ही श्रेयस्कर । दूरी रखने या अलग रहने से मेरा आशय यह नहीं कि उससे हम कोई उपयोगी रास्ता उनसे न लें । बल्कि यह कि उनकी आलोचना- निंदा के पचड़े में न पड़ें । तारीफ़ तो कर दें लेकिन बुराई करने से दूर रहें वरना आदमियों में दूरियाँ बढ़ेगी। लोगों से सम्पर्क में उनसे अन्य विषयों पर चरचा करें, धर्म खासकर सामने वाले के धर्म पर तो बिल्कुल नहीं ।
क्योंकि आख़िर सामाजिक समरसता भी तो एक उच्चकोटिक विचार है ?
वस्तुतः होता क्या है कि धर्म निगोड़ी ऐसी चीज़ है जो मनुष्य के जन्मते ही व्यक्ति की अपनी/परायी हो जाता है (यदि धर्म को secular/ व्यक्तिगत बना लें तो भी), जिससे पिंड छुड़ाना सबके लिए मुश्किल होता है । आपके लिए आसान है क्या ? फिर कैसे उम्मीद करते हैं कि दूसरा उससे विमुक्त होगा?
यह समझदारी की माँग है ।
इसलिए नास्तिकता की आलोचना कर लीजिए, वामपंथ को गाली दे दीजिए, अंबेडकर और संविधान की शल्य क्रिया कर लीजिए, क्योंकि ये धर्म नहीं बने हैं और इसीलिए इन्हें धर्म कहने का विरोध भी हो रहा है, लेकिन यीशु, मुहम्मद, कृष्ण, बुद्ध को कुछ मत कहिये। इन्हें पौराणिक ही सही, काल्पनिक कहानियों का साहित्यिक सरोकार समझ जीवन का आनंद लें। अन्यथा आपके बंधु मनुष्य मित्रों के मन को ठेस लगेगी/ लगती है । और करें भी क्यों ? करके कुछ हासिल न होगा । इतने दिनों के धर्मविरोधी अभियान तो इनके अप्रभावी होने का अनुभव देते हैं । तो इससे लाभ लिया जाय और कान को थोड़ा मानववादी तरीके से घुमाकर पकड़ा और फिर ऐंठा जाय । ये अपनी मौत मरेंगे, मरें तो मरें, विज्ञान की गति के आलोक में । इन्हें चिढ़ाएँगे तो बंदरिया मरे हुए बच्चे को और कसकर सीने से चिपका लेगी । सड़ांध और फैलेगी । (उग्रनाथ)

गुरुवार, 19 मार्च 2020

कोरोना मंदिर

अभी एक ख़ास खबर सुननी, पढ़नी बाक़ी है (ख़ैर अभी सुबह होने में भी तो 12 घण्टे बाकी हैं?)।
कि योगी जी कहीं हज़ार, दो हज़ार एकड़ जमीन दें और कोरोना माता मंदिर का निर्माण सरकारी खजाने से करवायें । (मोदी पीएम से उद्घाटन की घोषणा सहित)!

क्यों नहीं? यह तो जनता के स्वास्थ्य के हित में होगा ?
कोरोना देवी की मूर्ति चीन से बनवाकर मंगवाएँ और स्थापित करें । कितनी ऊँची? इसे पण्डित पुरोहितों से परामर्श कर तय करें । खर्चा जो भी लगे । जनकल्याण का प्रश्न है ।

हम एक हैं

विश्व एक है, विश्व की बीमारियाँ, समस्याएँ एक है , इनका इलाज, समाधान एक है, किसी भी देश से अपने को अलग करके देखना सही नहीं है, कोई भी मसला किसी का आंतरिक मामला नहीं हो सकता ।
यह और इतना तो सिखाया ही करोना माता ने ! 💐

भले भक्त कहें कि गोमाता ने गोबर देकर उन्हें वायरस से बचाया । ☺️
साम्यवादी सकुशल कह सकते हैं कि समाधान अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट, Communist International है ।👌
दुनिया के मजदूरो (पूंजीवाद के संक्रमित पीड़ितो) एक हो !👍

धरती एक है

विश्व एक है, विश्व की बीमारियाँ, समस्याएँ एक है , इनका इलाज, समाधान एक है, किसी भी देश से अपने को अलग करके देखना सही नहीं है, कोई भी मसला किसी का आंतरिक मामला नहीं हो सकता ।
यह और इतना तो सिखाया ही करोना माता ने ! 💐

भले भक्त कहें कि गोमाता ने गोबर देकर उन्हें वायरस से बचाया । ☺️
साम्यवादी सकुशल कह सकते हैं कि समाधान अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट, Communist International है ।👌
दुनिया के मजदूरो (पूंजीवाद के संक्रमित पीड़ितो) एक हो !👍

बुधवार, 18 मार्च 2020

Begone state

What a nonsense? Or a real sense ?
Just see, how the states withered away, fearing a invisible virus!☺️ सारे राज्य राजप्रासादों में सिमट गए ।😊 योगी is undergoing thermal test. Even almighty gods and goddesses are veiled. What a joke? What a nonsense? What a sense? Let the Corona disappear. Let not states prevail again. 👍👌💐

नमस्ते

नमस्ते" उत्तम है । या फिर अभिवादन के लिए जापानी तरीका मुझे अति सुंदर लगता है - दूर से थोड़ा सर झुकाकर, शालीन !👍 आपके सहमति की सदेच्छा !

Stateless ?

Coronascare is leading us to think about the very earlier said - Stateless Society. Make a way for it to come. No state could confront the Virus. Only individuals' precautions (अनुशासन) to replace the pandemic of state dictatorship.👍👌💐

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

शरीर से ऊपर

आप औरत हैं या मर्द, मैं नहीं जानता । मुझे नहीं पता और मुझे इससे कोई मतलब भी नहीं । मैं यह कहता हूँ कि आप शरीर से ऊपर सोचो !👍

गुरुवार, 12 मार्च 2020

रामराज्य में


आलोच्य तो फिर भी होगा, लेकिन एक बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है, मिल ही जायेगा कलयुगी लोकतन्त्र को रामराज्य में, यदि उसकी नीति कलयुगी रामभक्त लागू कर पाए तो ।
किसी पुरोहित ने स्मरण दिलाया है, इंगित किया है कि यदि निर्भया के एक ब्राह्मण अपराधी को फाँसी दी गयी तो यह ब्रह्म हत्या होगी जो पाप होगा, इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए ।
तो चलो एक तो पहले बचे फाँसी की सज़ा से, किसी बहाने सही ।

सोमवार, 9 मार्च 2020

जल्दी दबो

दबो कि जिससे
कोई तुम्हारा सर
कुचल न सके !

Dgspn

मैं विचारक नहीं, व्यक्ति हूँ मैं विचारणीय !

विचारणीय उन अर्थों में जिसमें मनुवादी "ताड़न" शब्द का भाव बताकर तुलसी बाबा के dgspn- "ताड़न के अधिकारी" का बचाव करते हैं ।

रविवार, 8 मार्च 2020

महिला दिवस

औरतें तो आज़ाद हो जाती हैं । माँएँ कभी आज़ाद नहीं हो पातीं । ज़िम्मेदारियाँ बहुत बड़ा बंधन है । गुलामी कहिये, उन्हें कहने दीजिये ।

विकल्पहीन

थोड़े में बसर करने के सिद्धांत का कोई विकल्प नहीं दिखता । दिखेगा तो बताएँगे । हमारा तो आज़माया हुआ है । हमारे Divya Ranjan Pathak " निर्विकार" इसके साक्षात उदाहरण हैं ।

To everyone according to his need की सफलता संदिग्ध है, क्योंकि Need की कोई सीमा नहीं है । सीमा हो जाय तो मार्क्सवाद आया समझो ।

आदर प्रेम

मैं प्रेम को ही आदर समझता हूँ और आदर को ही प्रेम समझता हूँ ।
(बतर्ज़ गाँधी जी :- सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है ।☺️)
- - - उग्रनाथ

रामराज्य

रामराज्य का मतलब ब्राह्मण राज है । या फिर ब्राह्मणवादी राज्य कह लीजिए । इसमें संदेह किस बात का ? देख ही रहे हैं । योगी मोदी शाह, सब ब्राह्मण हैं । ब्राह्मण ने तो हमेशा कहा, वर्ण को परिभाषित किया कि ब्राह्मण कोई भी अपने कर्मों से बन सकता है । तो यदि गवर्नर आरिफ़ मुहम्मद साहेब ब्राह्मण बन जायँ तो किमाश्चर्यम ?

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

छुअन

छू लिया तो छुअन का आनंद ग़ायब !

शरीर

ज़िंदगी का इतना सारा वक़्त तो अपना शरीर, इसका रख रखाव ही खा जाता है । दूसरों की सेवा के लिए क्या और कितना समय और अवसर बचता ही है ?

गुरुवार, 5 मार्च 2020

तेरे लिए जीना

जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं वह जल्दी मर जाते हैं । जो थोड़ा दूसरों का भी ख़्याल करते हैं वह ज़्यादा उम्र जीते हैं । ऐसा मेरा काल्पनिक अनुभव है ।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

जीवन यापन

पेट पालना
ज़िंदगी की महती
आवश्यकता,
महान उद्देश्य है
ज़िंदा रहना ।

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

राज्य जाय

भारत देश को सरकारी तंत्र से बाहर निकालना है । इसलिए मैं मानव हितैषी होकर भी कल्याणकारी राज्य के दंद फंद को हजम नहीं करता, क्योंकि इसी तरीके से राज्य अपना तख़्त पुख़्ता करता है, और फिर शोषण पर उतारू । तब मेरी नज़र राज्य के विलोपन, withering away of the state की ओर जाता है । यह न हो तो भी राज्य जितना भी कमजोर हो उतना ही अच्छा । इसीलिए मैं अरविंद केजरीवाल का भी ज़्यादा क़ायल नहीं हूँ!

एक सही वर्तनी हो तुम

कवितानुमा?
- - - -       -- -  
तुम मेरे नाम की
वर्तनी ग़लत लिख दो,
मेरे नाम के उच्चारण को
गालियों, तद्भव शब्दों से भर दो !
मेरे नाम की वर्तनी
सुगंधित हो जाएगी,
मेरे नाम का उच्चारण
महक उठेगा,
लेकिन तुम कोई नाम
लिखो तो सही,
कुछ बोलो तो सही !
- - -
(उग्रनाथ)

घर से मस्जिद है बहुत दूर

बाबरी मस्जिद के लिए ज़मीन अयोध्या शहर से बहुत दूर दी गयी ।
कहते हैं बेग़म हज़रत महल ने पुराना हनुमान मंदिर अलीगंज के लिए भी ज़मीन दी थी । तब तो यह भी लखनऊ शहर से बहुत बाहर रहा होगा ?
सोचता हूँ , क्या यह सही हुआ ? क्या यह ज़रूरी था ? इससे सद्भावना बढ़ी, या धार्मिक अंधता और उन्माद ?

बशिष्ठ नगर

अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी बनाने के बाद अब हमारे नाम को भी बदलने की तैयारी हो रही है । हम अहसास बस्तवी अब अहसास बशिष्ठी हो जायँगे ।
लेकिन अच्छा हुआ हम पहले ही बस्ती से कटकर सिद्धार्थनागरी हो चुके थे । ☺️

विज्ञान चेतना अवरोध

Scientific Temperament
भारत में वैज्ञानिक चेतना का विकास न हो पाने, इसके अवरुद्ध होने का एक कारण मेरी समझ में आता है । वह है अस्पतालों की दुर्दशा, चिकित्सा के क्षेत्र का व्यापारीकरण, डॉक्टरी पेशे के व्यवसायीकरण, और डॉक्टरों का हृदयहीन छवि समाज में व्याप्त होना ।
साधारण जनता के सामने डॉक्टरों की जमात विज्ञान और वैज्ञानिकता की प्रतिनिधि के रूप में सामने आती है । और इन ख़ुदा और भगवान माने जाने वाले जनसेवकों की यह स्तरहीनता उन्हें विज्ञान विमुख करने में बड़ी भूमिका निभाती है । ऐसा मेरा आकलन, estimation है ।

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

वैकल्पिक बाबर

बाबरी मस्जिद नाम कोई रखेगा थोड़े ही । ख़ुद हिन्दू ही अपने आप इसे पुकारने लगेंगे । ऐसे कि यह बाबरी मस्जिद के विकल्प में बना है । यह गलती तो सुप्रीम कोर्ट ने की । मुस्लिम पक्ष ने इसकी demand तो की नहीं थी । मुकदमे पर न्याय के अनुसार इसे वहीं मिलना था । न्याय न मिला तो वैकल्पिक जमीन तो उन्होंने माँगी न थी । नहीं देनी चाहिए थी ।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

बाबर को श्रेय

क्या तो विडंबना का चिंतन है या चिंतन की विडंबना ? कहना पड़ता है कि यदि बाबर नेअयोध्या में तथाकथित राम मंदिर तोड़कर मस्जिद न बनवाई होती तो क्या एक काल्पनिक नायक चरित्र, साहित्यिक आवतारिक पात्र का इतना बड़ा, ऐसा भव्य मंदिर बन पाता ?
कहीं भी तो इनका कोई आराध्य मंदिर परंपरा में दृष्टिगोचर नहीं है । तो क्या मंदिर निर्माण का मूल श्रेय बाबर को दिया जाय ? कैसी विडंबना है, न हाँ कहते बनता है, न ना कहते बनता है । 😢

रविवार, 23 फ़रवरी 2020

धनी दलित

भारत में कोई दलित गरीब नहीं, मायावती जी यह बताना चाहती हैं ।

शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

जीना

हर आदमी को जीने का हक़ है, और उन्हें ज़िंदगी के समान मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी हमारी है ।
(नागरिक उवाच)

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

हिंसा में करुणा ?

हिंसा में भी दया, करुणा की आवश्यकता होती है :-
घर चूहों से परेशान था । दुकानदार की सलाह से चिपकने वाली चटाई ले आया । सुबह दो चूहे चिपके मरे पड़े मिले । फेंकने गया तो उनकी छटपटाहट की कल्पना से सिहर गया । यह तकलीफदेह हिंसा थी । एक हिंसा वह भी होती यदि उन्हें चूहेदानी में फंसाकर बाहर छोड़ता । यह हिंसा दयापूर्ण, करुणामय होती । ऐसा ख़्याल आया । यह नहीं कि हिंसा तो दोनो ही है, क्या फ़र्क़ पड़ता है ।
ऐसा ही कुछ फ़र्क़ जानवरों को जिबह करने में भी है । बयान और समीक्षा करना कठिन है मेरे लिए ।

चाय

चाय बनायी, मैंने पी;
और ज़िन्दगी ताज़ा जी ।

महरूम

मुझे इस इस बात का मलाल है कि मुझे अच्छे आदमियों का साथ नहीं मिला, उनसे संपर्क नहीं हुआ, उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला । तो, शायद मैं ही अच्छा आदमी नहीं था ।

जीवन शैली

हिन्दू एक जीवन शैली है ।
- - तो मुस्लिम क्या मरण की ?

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

भोगी हुई कल्पना

केवल भोगा हुआ यथार्थ ही नहीं होता, भोगी हुई कल्पना भी होती है।

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

अनुसरण

यदि हमारे पास पर्याप्त मस्तिष्क नहीं है, और ज़ाहिर सी बात है कि सबके पास नहीं होती,  तो हमें किसी का अनुसरण करना पड़ता है । करना ही चाहिए । सिद्धांतविहीन जीवन नहीं जीना चाहिए ।

हिन्दू राष्ट्र

हमें यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है । बल्कि इसमें तो हमको ही आसानी है । हम निर्द्वन्द्व हो जायेंगे जो कि हम तमाम धर्मों के बीच नहीं हो पा रहे हैं । क्योंकि तब हम  लेकिन केवल हिंदू राष्ट्र राज्य धर्म और संस्कृति की ही आलोचना धड़ल्ले से कर सकेंगे,  किन्हीं अन्य धर्मों, मजहबों, संस्कृतियों की नहीं (हमें उनसे प्रयोजन ही क्या है हिन्दू देश में ) ? भारत के हिंदू राष्ट्र होते ही हम इसका अधिकारी हो जाएंगे और हिंदू इसका पात्र हो जाएगा कि वह हमारी आलोचना का शिकार बने । है न हमारी बात सही यदि हम मान लें कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है ? लेकिन तब फिर यह न कहिएगा कि "उनकी देखो" / "उनको कुछ नहीं कहते" । अरे भाई, अब उनकी क्या औकात ? तुम्हीं बोओ तुम्हीं काटो, तुम्हीं झेलो । बो तो रहे हो बबूल के पेड़ !😢

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

वेश्यावृत्ति

वेश्यावृत्ति का कोई विकल्प दिख नहीं रहा है ।
या, इसे यूँ कहें कि :-
वेश्यावृत्ति से निज़ात (मुक्ति, छुटकारा) का कोई उपाय नहीं दिख रहा ।

Shave

शेविंग (Shaving) ज़िंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।

शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

दुनियावादी, दुनियादार नहीं

दुनियावादी (Secular, इहलौकिक, भौतिक- सांसारिक) तो मैं खूब हूँ । लेकिन दुनियादारी से बहुत दूर ! और चालाकी से तो मुझे सख़्त नफ़रत है ।

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

नास्तिक, भला आदमी

मुझे फ़ख्र है कि, बन भले नहीं पाया, लेकिन एक अच्छा मनुष्य बनने की कामना में मैं नास्तिक बना !👍👌💐

Rid of reigion

Valentine !👍WE ALL,
Everybody Loves Everybody, चुनांचे,
We get rid of our caste, creed, religion, masculinity, nationality etc,
The bondages of Humanity. ☺️💐

Valentine

Good gesture ☺️. Valentine, new year, chrismas का धूमधाम से मनाया जाना यह show करता है कि मनुष्य उत्सव के लिए धर्म देश etc की कोई सीमा नहीं देखता । अभी घण्टा भर पहले मैं विचार कर रहा था कि हम सेकुलर नास्तिकों को भारत में वह उत्सव मनाना चाहिए जो हमारे नहीं हैं, मतलब देश के प्रमुख धर्मों के नहीं हैं । हमें हिन्दू मुस्लिम त्योहारों के बजाय ईसाई उत्सव मनाने चाहिए ।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

अरब में मंदिर

भैये, अब आप लोग बस मंदिर बनाने का ठेका लो । अरब में, अमरीका में, अयोध्या में, और दुनिया भर में । यह राज्य चलाने का हौसला छोड़ दो । तुमसे न होगा, तुम्हारे बस का नहीं यह काम ।

विपत्ति

दुनिया में सुना, सम्पत्ति बहुत ;
दुनिया ने कहा, है विपत्ति बहुत ।😢

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

असफलता

आप मेरी बात पर क्या चौंकेंगे नहीं, यदि मैं आपसे कहूँ कि मुझे अपनी असफलता से प्रेम है ? बल्कि मुझे इस पर नाज़ भी है । क्योंकि मैंने काम बहुत किया इसके सहारे । बहुत लिख डाला मैंने अपने मन की बातें । सफलता असफलता के द्वंद्व ने मुझे मेरे काम से रोका नहीं, कोई विघ्न व्यवधान नहीं डाला । सफलता की कामना ही मेरे मन में नहीं उपजी । मैं निश्चिंत चलता रहा, बेखबर, निर्द्वंन्द्व हाथ पाँव चलाता रहा । जब तक जिया सक्रिय रहा ।

मैं कहाँ

WE are our nationhood defined लिखकर उन्होंने तो अपनी राष्ट्रीयता define या पक्की तो क्या, राष्ट्र पर कब्ज़ा ही कर लिया । अब हमसे पूछते हैं तुम कहाँ के रहने वाले हो ?

चिंता विषय

Points to ponder :-
* बाबर, सावरकर में इतनी साहित्यिक- ध्वन्यात्मक समानता क्यों है ?

* हमने लोकतन्त्र का चुनाव किया था । आज़ादी के बाद लोकतन्त्र चुना था । हमें लोकतन्त्र ही चाहिए । Is the state succeeding or failing to provide ? सड़क पर सामान्यतः चलने, बोलने, लिखने पढ़ने में डर क्यों लगता है ? हम विश्वप्रसिद्ध दर्शन की किताबें घर में क्यों नहीं रख सकते ?

* संघ (भेंड़-बकरी झुंड) को एक intense प्रहार, इस पर करारा वार होना चाहिए, यदि कोई हिंदुत्व और हिन्दू श्रेष्ठता को बचाना, सभ्य हिन्दू राज्य को कामयाब करना चाहता है । यह तो भाई, मुल्क को जंगली बना रहे हैं । क्या यह शोक और चिंता की बात नहीं है ?😢

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

नाराज़

मैं नाराज हूँ
सत्ता के पुलिसिया
व्यवहार से !😢

नीति विहीन

यह बात मुसलमान तो कहेगा नहीं । तो इसे यदि हम शूद्र, शुद्ध, श्रेष्ठ हिन्दू न कहेंगे तो कौन कहेगा ! - -  कि सनातनी पाखण्डी हिंदुओं की न कोई नीति है, न नियम, न नैतिकता । यह कुछ भी अच्छे से अच्छा, बुरा से बुरा कर सकते हैं । या कुछ भी नहीं कर सकते हैं (अकर्म)।
कुछ भी, लेकिन किसी सिद्धांत के अधीन नहीं ।
तो फिर इसके राज्य का क्या रोना? कैसी शिकवा, क्या शिकायत ?

Individualism

Idea:-
Individualism / Individualist
*अकेला आदमी जो कर/ बन सकता है ।
*अकेले अकेले एकलव्य जन ।
*आदमी के अंदर का असल आदमी, जो हर दूसरे आदमी से अलग/भिन्न है ।

प्रार्थना

किसी ने पूछा - क्या तुम सचमुच ईश्वर की प्रार्थना नहीं करोगे ?
मैंने कहा - क्यों नहीं ? क्यों नहीं करूँगा ? मेरी मजाल कि मैं ईश्वर की प्रार्थना न करूँ ? - -
- -  लेकिन अपने लिए नहीं । आपके पुत्र- पुत्री, परिवार की खैरियत के लिए ज़रूर ईश्वर से दुआ करूँगा ।
(उग्रनाथ नागरिक)

वक़्त खराब

सर न उठा
दब-दबाकर जी
वक़्त खराब ।

गुस्सा

मैं गुस्सा जल्दी
हो जाता हूँ, लेकिन
खुश देर से ।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

स्वास्थ्य

मेरे स्वास्थ्य का राज़ (सम्भवतः) यह रहा, कि मैंने कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं ।☺️

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

आग मूते हैं

देशद्रोही था,
अ-नागरिक हुआ
तो क्या अचंभा !
- - -   
आग मूते हैं
आख़िर तो मरेंगे
सारे के सारे !

All मुस्लिम

क्या अद्भुत विडंबना है ! या दुर्भाग्य कहें भारत वर्ष का कि इसकी सारी नागरिकता मुसलमान से जुड़ गई है ।
हिंदू का आशय क्या?  एंटी मुसलमान अब हिंदू की परिभाषा हो गई है, मुसलमान/इस्लाम की मुख़ालिफ़त हिंदुत्व हो गया है । Pro मुसलमान या Non practicing मुसलमान नाम हो गया है लोकतन्त्र समर्थक सेक्युलर जनसंख्या का (जिन्हें अर्बन नक्सल भी कहते हैं उपरोक्त हिन्दू)। और जो पैदाइशी मुसलमान हैं वह तो मुसलमान हैं ही । आशय यह कि भारत के किसी भी नागरिक (राजनीतिक मनुष्य) की पहचान मुस्लिम suffix/prefix OR anti/pro- मुस्लिम के बग़ैर पूरी नहीं होती । 😢

जीवन दान

लगे हाथ बाबरी ध्वंस के अपराधियों को भी छुटकारा दिला दें, गद्दी जाने से पहले । साध्वी को तो अभी लम्बी उम्र जीनी है, लेकिन बेचारे आडवाणी जी तो चैन से अंतिम साँस ले पाएँ !😢