गुरुवार, 19 मार्च 2020

धरती एक है

विश्व एक है, विश्व की बीमारियाँ, समस्याएँ एक है , इनका इलाज, समाधान एक है, किसी भी देश से अपने को अलग करके देखना सही नहीं है, कोई भी मसला किसी का आंतरिक मामला नहीं हो सकता ।
यह और इतना तो सिखाया ही करोना माता ने ! 💐

भले भक्त कहें कि गोमाता ने गोबर देकर उन्हें वायरस से बचाया । ☺️
साम्यवादी सकुशल कह सकते हैं कि समाधान अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट, Communist International है ।👌
दुनिया के मजदूरो (पूंजीवाद के संक्रमित पीड़ितो) एक हो !👍

बुधवार, 18 मार्च 2020

Begone state

What a nonsense? Or a real sense ?
Just see, how the states withered away, fearing a invisible virus!☺️ सारे राज्य राजप्रासादों में सिमट गए ।😊 योगी is undergoing thermal test. Even almighty gods and goddesses are veiled. What a joke? What a nonsense? What a sense? Let the Corona disappear. Let not states prevail again. 👍👌💐

नमस्ते

नमस्ते" उत्तम है । या फिर अभिवादन के लिए जापानी तरीका मुझे अति सुंदर लगता है - दूर से थोड़ा सर झुकाकर, शालीन !👍 आपके सहमति की सदेच्छा !

Stateless ?

Coronascare is leading us to think about the very earlier said - Stateless Society. Make a way for it to come. No state could confront the Virus. Only individuals' precautions (अनुशासन) to replace the pandemic of state dictatorship.👍👌💐

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

शरीर से ऊपर

आप औरत हैं या मर्द, मैं नहीं जानता । मुझे नहीं पता और मुझे इससे कोई मतलब भी नहीं । मैं यह कहता हूँ कि आप शरीर से ऊपर सोचो !👍

गुरुवार, 12 मार्च 2020

रामराज्य में


आलोच्य तो फिर भी होगा, लेकिन एक बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है, मिल ही जायेगा कलयुगी लोकतन्त्र को रामराज्य में, यदि उसकी नीति कलयुगी रामभक्त लागू कर पाए तो ।
किसी पुरोहित ने स्मरण दिलाया है, इंगित किया है कि यदि निर्भया के एक ब्राह्मण अपराधी को फाँसी दी गयी तो यह ब्रह्म हत्या होगी जो पाप होगा, इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए ।
तो चलो एक तो पहले बचे फाँसी की सज़ा से, किसी बहाने सही ।

सोमवार, 9 मार्च 2020

जल्दी दबो

दबो कि जिससे
कोई तुम्हारा सर
कुचल न सके !

Dgspn

मैं विचारक नहीं, व्यक्ति हूँ मैं विचारणीय !

विचारणीय उन अर्थों में जिसमें मनुवादी "ताड़न" शब्द का भाव बताकर तुलसी बाबा के dgspn- "ताड़न के अधिकारी" का बचाव करते हैं ।

रविवार, 8 मार्च 2020

महिला दिवस

औरतें तो आज़ाद हो जाती हैं । माँएँ कभी आज़ाद नहीं हो पातीं । ज़िम्मेदारियाँ बहुत बड़ा बंधन है । गुलामी कहिये, उन्हें कहने दीजिये ।

विकल्पहीन

थोड़े में बसर करने के सिद्धांत का कोई विकल्प नहीं दिखता । दिखेगा तो बताएँगे । हमारा तो आज़माया हुआ है । हमारे Divya Ranjan Pathak " निर्विकार" इसके साक्षात उदाहरण हैं ।

To everyone according to his need की सफलता संदिग्ध है, क्योंकि Need की कोई सीमा नहीं है । सीमा हो जाय तो मार्क्सवाद आया समझो ।

आदर प्रेम

मैं प्रेम को ही आदर समझता हूँ और आदर को ही प्रेम समझता हूँ ।
(बतर्ज़ गाँधी जी :- सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है ।☺️)
- - - उग्रनाथ

रामराज्य

रामराज्य का मतलब ब्राह्मण राज है । या फिर ब्राह्मणवादी राज्य कह लीजिए । इसमें संदेह किस बात का ? देख ही रहे हैं । योगी मोदी शाह, सब ब्राह्मण हैं । ब्राह्मण ने तो हमेशा कहा, वर्ण को परिभाषित किया कि ब्राह्मण कोई भी अपने कर्मों से बन सकता है । तो यदि गवर्नर आरिफ़ मुहम्मद साहेब ब्राह्मण बन जायँ तो किमाश्चर्यम ?

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

छुअन

छू लिया तो छुअन का आनंद ग़ायब !

शरीर

ज़िंदगी का इतना सारा वक़्त तो अपना शरीर, इसका रख रखाव ही खा जाता है । दूसरों की सेवा के लिए क्या और कितना समय और अवसर बचता ही है ?

गुरुवार, 5 मार्च 2020

तेरे लिए जीना

जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं वह जल्दी मर जाते हैं । जो थोड़ा दूसरों का भी ख़्याल करते हैं वह ज़्यादा उम्र जीते हैं । ऐसा मेरा काल्पनिक अनुभव है ।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

जीवन यापन

पेट पालना
ज़िंदगी की महती
आवश्यकता,
महान उद्देश्य है
ज़िंदा रहना ।

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

राज्य जाय

भारत देश को सरकारी तंत्र से बाहर निकालना है । इसलिए मैं मानव हितैषी होकर भी कल्याणकारी राज्य के दंद फंद को हजम नहीं करता, क्योंकि इसी तरीके से राज्य अपना तख़्त पुख़्ता करता है, और फिर शोषण पर उतारू । तब मेरी नज़र राज्य के विलोपन, withering away of the state की ओर जाता है । यह न हो तो भी राज्य जितना भी कमजोर हो उतना ही अच्छा । इसीलिए मैं अरविंद केजरीवाल का भी ज़्यादा क़ायल नहीं हूँ!

एक सही वर्तनी हो तुम

कवितानुमा?
- - - -       -- -  
तुम मेरे नाम की
वर्तनी ग़लत लिख दो,
मेरे नाम के उच्चारण को
गालियों, तद्भव शब्दों से भर दो !
मेरे नाम की वर्तनी
सुगंधित हो जाएगी,
मेरे नाम का उच्चारण
महक उठेगा,
लेकिन तुम कोई नाम
लिखो तो सही,
कुछ बोलो तो सही !
- - -
(उग्रनाथ)

घर से मस्जिद है बहुत दूर

बाबरी मस्जिद के लिए ज़मीन अयोध्या शहर से बहुत दूर दी गयी ।
कहते हैं बेग़म हज़रत महल ने पुराना हनुमान मंदिर अलीगंज के लिए भी ज़मीन दी थी । तब तो यह भी लखनऊ शहर से बहुत बाहर रहा होगा ?
सोचता हूँ , क्या यह सही हुआ ? क्या यह ज़रूरी था ? इससे सद्भावना बढ़ी, या धार्मिक अंधता और उन्माद ?

बशिष्ठ नगर

अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी बनाने के बाद अब हमारे नाम को भी बदलने की तैयारी हो रही है । हम अहसास बस्तवी अब अहसास बशिष्ठी हो जायँगे ।
लेकिन अच्छा हुआ हम पहले ही बस्ती से कटकर सिद्धार्थनागरी हो चुके थे । ☺️

विज्ञान चेतना अवरोध

Scientific Temperament
भारत में वैज्ञानिक चेतना का विकास न हो पाने, इसके अवरुद्ध होने का एक कारण मेरी समझ में आता है । वह है अस्पतालों की दुर्दशा, चिकित्सा के क्षेत्र का व्यापारीकरण, डॉक्टरी पेशे के व्यवसायीकरण, और डॉक्टरों का हृदयहीन छवि समाज में व्याप्त होना ।
साधारण जनता के सामने डॉक्टरों की जमात विज्ञान और वैज्ञानिकता की प्रतिनिधि के रूप में सामने आती है । और इन ख़ुदा और भगवान माने जाने वाले जनसेवकों की यह स्तरहीनता उन्हें विज्ञान विमुख करने में बड़ी भूमिका निभाती है । ऐसा मेरा आकलन, estimation है ।

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

वैकल्पिक बाबर

बाबरी मस्जिद नाम कोई रखेगा थोड़े ही । ख़ुद हिन्दू ही अपने आप इसे पुकारने लगेंगे । ऐसे कि यह बाबरी मस्जिद के विकल्प में बना है । यह गलती तो सुप्रीम कोर्ट ने की । मुस्लिम पक्ष ने इसकी demand तो की नहीं थी । मुकदमे पर न्याय के अनुसार इसे वहीं मिलना था । न्याय न मिला तो वैकल्पिक जमीन तो उन्होंने माँगी न थी । नहीं देनी चाहिए थी ।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

बाबर को श्रेय

क्या तो विडंबना का चिंतन है या चिंतन की विडंबना ? कहना पड़ता है कि यदि बाबर नेअयोध्या में तथाकथित राम मंदिर तोड़कर मस्जिद न बनवाई होती तो क्या एक काल्पनिक नायक चरित्र, साहित्यिक आवतारिक पात्र का इतना बड़ा, ऐसा भव्य मंदिर बन पाता ?
कहीं भी तो इनका कोई आराध्य मंदिर परंपरा में दृष्टिगोचर नहीं है । तो क्या मंदिर निर्माण का मूल श्रेय बाबर को दिया जाय ? कैसी विडंबना है, न हाँ कहते बनता है, न ना कहते बनता है । 😢

रविवार, 23 फ़रवरी 2020

धनी दलित

भारत में कोई दलित गरीब नहीं, मायावती जी यह बताना चाहती हैं ।

शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

जीना

हर आदमी को जीने का हक़ है, और उन्हें ज़िंदगी के समान मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी हमारी है ।
(नागरिक उवाच)

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

हिंसा में करुणा ?

हिंसा में भी दया, करुणा की आवश्यकता होती है :-
घर चूहों से परेशान था । दुकानदार की सलाह से चिपकने वाली चटाई ले आया । सुबह दो चूहे चिपके मरे पड़े मिले । फेंकने गया तो उनकी छटपटाहट की कल्पना से सिहर गया । यह तकलीफदेह हिंसा थी । एक हिंसा वह भी होती यदि उन्हें चूहेदानी में फंसाकर बाहर छोड़ता । यह हिंसा दयापूर्ण, करुणामय होती । ऐसा ख़्याल आया । यह नहीं कि हिंसा तो दोनो ही है, क्या फ़र्क़ पड़ता है ।
ऐसा ही कुछ फ़र्क़ जानवरों को जिबह करने में भी है । बयान और समीक्षा करना कठिन है मेरे लिए ।

चाय

चाय बनायी, मैंने पी;
और ज़िन्दगी ताज़ा जी ।

महरूम

मुझे इस इस बात का मलाल है कि मुझे अच्छे आदमियों का साथ नहीं मिला, उनसे संपर्क नहीं हुआ, उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला । तो, शायद मैं ही अच्छा आदमी नहीं था ।

जीवन शैली

हिन्दू एक जीवन शैली है ।
- - तो मुस्लिम क्या मरण की ?

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

भोगी हुई कल्पना

केवल भोगा हुआ यथार्थ ही नहीं होता, भोगी हुई कल्पना भी होती है।

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

अनुसरण

यदि हमारे पास पर्याप्त मस्तिष्क नहीं है, और ज़ाहिर सी बात है कि सबके पास नहीं होती,  तो हमें किसी का अनुसरण करना पड़ता है । करना ही चाहिए । सिद्धांतविहीन जीवन नहीं जीना चाहिए ।

हिन्दू राष्ट्र

हमें यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है । बल्कि इसमें तो हमको ही आसानी है । हम निर्द्वन्द्व हो जायेंगे जो कि हम तमाम धर्मों के बीच नहीं हो पा रहे हैं । क्योंकि तब हम  लेकिन केवल हिंदू राष्ट्र राज्य धर्म और संस्कृति की ही आलोचना धड़ल्ले से कर सकेंगे,  किन्हीं अन्य धर्मों, मजहबों, संस्कृतियों की नहीं (हमें उनसे प्रयोजन ही क्या है हिन्दू देश में ) ? भारत के हिंदू राष्ट्र होते ही हम इसका अधिकारी हो जाएंगे और हिंदू इसका पात्र हो जाएगा कि वह हमारी आलोचना का शिकार बने । है न हमारी बात सही यदि हम मान लें कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है ? लेकिन तब फिर यह न कहिएगा कि "उनकी देखो" / "उनको कुछ नहीं कहते" । अरे भाई, अब उनकी क्या औकात ? तुम्हीं बोओ तुम्हीं काटो, तुम्हीं झेलो । बो तो रहे हो बबूल के पेड़ !😢

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

वेश्यावृत्ति

वेश्यावृत्ति का कोई विकल्प दिख नहीं रहा है ।
या, इसे यूँ कहें कि :-
वेश्यावृत्ति से निज़ात (मुक्ति, छुटकारा) का कोई उपाय नहीं दिख रहा ।

Shave

शेविंग (Shaving) ज़िंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।

शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

दुनियावादी, दुनियादार नहीं

दुनियावादी (Secular, इहलौकिक, भौतिक- सांसारिक) तो मैं खूब हूँ । लेकिन दुनियादारी से बहुत दूर ! और चालाकी से तो मुझे सख़्त नफ़रत है ।

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

नास्तिक, भला आदमी

मुझे फ़ख्र है कि, बन भले नहीं पाया, लेकिन एक अच्छा मनुष्य बनने की कामना में मैं नास्तिक बना !👍👌💐

Rid of reigion

Valentine !👍WE ALL,
Everybody Loves Everybody, चुनांचे,
We get rid of our caste, creed, religion, masculinity, nationality etc,
The bondages of Humanity. ☺️💐

Valentine

Good gesture ☺️. Valentine, new year, chrismas का धूमधाम से मनाया जाना यह show करता है कि मनुष्य उत्सव के लिए धर्म देश etc की कोई सीमा नहीं देखता । अभी घण्टा भर पहले मैं विचार कर रहा था कि हम सेकुलर नास्तिकों को भारत में वह उत्सव मनाना चाहिए जो हमारे नहीं हैं, मतलब देश के प्रमुख धर्मों के नहीं हैं । हमें हिन्दू मुस्लिम त्योहारों के बजाय ईसाई उत्सव मनाने चाहिए ।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

अरब में मंदिर

भैये, अब आप लोग बस मंदिर बनाने का ठेका लो । अरब में, अमरीका में, अयोध्या में, और दुनिया भर में । यह राज्य चलाने का हौसला छोड़ दो । तुमसे न होगा, तुम्हारे बस का नहीं यह काम ।

विपत्ति

दुनिया में सुना, सम्पत्ति बहुत ;
दुनिया ने कहा, है विपत्ति बहुत ।😢

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

असफलता

आप मेरी बात पर क्या चौंकेंगे नहीं, यदि मैं आपसे कहूँ कि मुझे अपनी असफलता से प्रेम है ? बल्कि मुझे इस पर नाज़ भी है । क्योंकि मैंने काम बहुत किया इसके सहारे । बहुत लिख डाला मैंने अपने मन की बातें । सफलता असफलता के द्वंद्व ने मुझे मेरे काम से रोका नहीं, कोई विघ्न व्यवधान नहीं डाला । सफलता की कामना ही मेरे मन में नहीं उपजी । मैं निश्चिंत चलता रहा, बेखबर, निर्द्वंन्द्व हाथ पाँव चलाता रहा । जब तक जिया सक्रिय रहा ।

मैं कहाँ

WE are our nationhood defined लिखकर उन्होंने तो अपनी राष्ट्रीयता define या पक्की तो क्या, राष्ट्र पर कब्ज़ा ही कर लिया । अब हमसे पूछते हैं तुम कहाँ के रहने वाले हो ?

चिंता विषय

Points to ponder :-
* बाबर, सावरकर में इतनी साहित्यिक- ध्वन्यात्मक समानता क्यों है ?

* हमने लोकतन्त्र का चुनाव किया था । आज़ादी के बाद लोकतन्त्र चुना था । हमें लोकतन्त्र ही चाहिए । Is the state succeeding or failing to provide ? सड़क पर सामान्यतः चलने, बोलने, लिखने पढ़ने में डर क्यों लगता है ? हम विश्वप्रसिद्ध दर्शन की किताबें घर में क्यों नहीं रख सकते ?

* संघ (भेंड़-बकरी झुंड) को एक intense प्रहार, इस पर करारा वार होना चाहिए, यदि कोई हिंदुत्व और हिन्दू श्रेष्ठता को बचाना, सभ्य हिन्दू राज्य को कामयाब करना चाहता है । यह तो भाई, मुल्क को जंगली बना रहे हैं । क्या यह शोक और चिंता की बात नहीं है ?😢

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

नाराज़

मैं नाराज हूँ
सत्ता के पुलिसिया
व्यवहार से !😢

नीति विहीन

यह बात मुसलमान तो कहेगा नहीं । तो इसे यदि हम शूद्र, शुद्ध, श्रेष्ठ हिन्दू न कहेंगे तो कौन कहेगा ! - -  कि सनातनी पाखण्डी हिंदुओं की न कोई नीति है, न नियम, न नैतिकता । यह कुछ भी अच्छे से अच्छा, बुरा से बुरा कर सकते हैं । या कुछ भी नहीं कर सकते हैं (अकर्म)।
कुछ भी, लेकिन किसी सिद्धांत के अधीन नहीं ।
तो फिर इसके राज्य का क्या रोना? कैसी शिकवा, क्या शिकायत ?

Individualism

Idea:-
Individualism / Individualist
*अकेला आदमी जो कर/ बन सकता है ।
*अकेले अकेले एकलव्य जन ।
*आदमी के अंदर का असल आदमी, जो हर दूसरे आदमी से अलग/भिन्न है ।

प्रार्थना

किसी ने पूछा - क्या तुम सचमुच ईश्वर की प्रार्थना नहीं करोगे ?
मैंने कहा - क्यों नहीं ? क्यों नहीं करूँगा ? मेरी मजाल कि मैं ईश्वर की प्रार्थना न करूँ ? - -
- -  लेकिन अपने लिए नहीं । आपके पुत्र- पुत्री, परिवार की खैरियत के लिए ज़रूर ईश्वर से दुआ करूँगा ।
(उग्रनाथ नागरिक)

वक़्त खराब

सर न उठा
दब-दबाकर जी
वक़्त खराब ।

गुस्सा

मैं गुस्सा जल्दी
हो जाता हूँ, लेकिन
खुश देर से ।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

स्वास्थ्य

मेरे स्वास्थ्य का राज़ (सम्भवतः) यह रहा, कि मैंने कभी अपने बारे में सोचा ही नहीं ।☺️

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

आग मूते हैं

देशद्रोही था,
अ-नागरिक हुआ
तो क्या अचंभा !
- - -   
आग मूते हैं
आख़िर तो मरेंगे
सारे के सारे !

All मुस्लिम

क्या अद्भुत विडंबना है ! या दुर्भाग्य कहें भारत वर्ष का कि इसकी सारी नागरिकता मुसलमान से जुड़ गई है ।
हिंदू का आशय क्या?  एंटी मुसलमान अब हिंदू की परिभाषा हो गई है, मुसलमान/इस्लाम की मुख़ालिफ़त हिंदुत्व हो गया है । Pro मुसलमान या Non practicing मुसलमान नाम हो गया है लोकतन्त्र समर्थक सेक्युलर जनसंख्या का (जिन्हें अर्बन नक्सल भी कहते हैं उपरोक्त हिन्दू)। और जो पैदाइशी मुसलमान हैं वह तो मुसलमान हैं ही । आशय यह कि भारत के किसी भी नागरिक (राजनीतिक मनुष्य) की पहचान मुस्लिम suffix/prefix OR anti/pro- मुस्लिम के बग़ैर पूरी नहीं होती । 😢

जीवन दान

लगे हाथ बाबरी ध्वंस के अपराधियों को भी छुटकारा दिला दें, गद्दी जाने से पहले । साध्वी को तो अभी लम्बी उम्र जीनी है, लेकिन बेचारे आडवाणी जी तो चैन से अंतिम साँस ले पाएँ !😢

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

मज़ाक

वह मुझसे मज़ाक़ करता है
मैं उससे मज़ाक़ करता है,
उसने मुझे दुनिया में भेजा
मैं उसे भी खींच लाया । ☺️

खुला आसमान

धीरे धीरे खुल रहा है आसमान,
सूर्य निकलेगा तो चाँदनी होगी ।

आया नहीं

जिसके लिए
इतनी तैयारी की,
आया ही नहीं ।

क्रांतिकारी भजन ?

क्रांतिकारी भजन ?
- - - - - - - - - - -- - -- -
परभू के गुन गाते चलो,
ईंट से ईंट बजाते चलो । ☺️👍

गांधी को नहीं मारा

मान गए । ज़रूर होंगे मुसलमान जालिम । ज़रूर किया हो सकता है इन्होंने ज़बरन धर्मांतरण कभी पूर्व में ।
लेकिन इन्होंने कभी गाँधी को नहीं मारा । किसी गांधी को नहीं मारा । सरहदी गांधी को भी नहीं । अब्दुल कलाम को कुछ नहीं कहा । और अभी भी मोहम्मद आरिफ़, शाहनवाज़, तारिक फ़तह को कुछ नहीं कह रहे हैं । कोई अपशब्द नहीं । तो, इससे क्या निष्कर्ष निकाला जाय ?
कोई अपवाद हो तो बताएं । मैं अपनी धारणा बदल लूँगा ।
(गांधी बलिदान दिवस पर विशेष)

राजनय

समझ में नहीं आया कि यह लोग इतनी बड़ी डिप्लोमेटिक, राजनयिक गलती क्यों कर रहे हैं ? यदि यह पाकिस्तान से पीड़ित हिंदुओं के साथ मुसलमानों को भी आने देते तो दुनिया में यह कहने को हो जाते और पाकिस्तान इससे बदनाम होता कि देखो पाकिस्तान में मुसलमानों पर भी जुल्म हो रहे हैं, और भारत उनको शरण दे रहा है । है न मेरा भारत महान !
ऐसा यह लोग क्यों नहीं कर रहे हैं, बल्कि न करने की ज़िद पर अड़े हैं, इसका कारण समझ में नहीं आता !

क्षमादान

निर्भया कांड के बाद आसाराम बापू ने कहा था कि यदि निर्भया उनको भैया कहकर पुकार देती तो वे उसके साथ निर्दयता ना करते और छोड़ देते ।
तो उसी धुन, आशा और प्रत्याशा पर यदि आज चारों अपराधी राष्ट्रपति को, न्यायाधीश को, भारत सरकार को माई बाप कह कर गिड़गिड़ाए, तो उन्हे छूट मिल जानी चाहिए ना ? 👍

बुधवार, 29 जनवरी 2020

मुस्लिम इस्लाम

जब आप बहुत इस्लाम और मुसलमान का जाप करते हैं तो जानते हैं क्या करते हैं ? और आप जान भी नहीं पाते ।
कि इस प्रकार आप इनकी मजबूती को, इनकी ताकत को वैधता और मान्यता प्रदान करते हैं ! बल्कि और बल प्रदान करते हैं ।
इससे पता चलता है कि आप इनसे न केवल जलते या खार खाते हैं बल्कि इनसे आप डरते हैं । वरना यदि आप शक्तिशाली हो तो इनसे भला क्या डर होता इनसे? क्या डरना इनसे ?
या किसी भी मनुष्य या किसी सिद्धांत-वाद- धर्म से?
आप सचमुच अपनी आध्यात्मिक कमज़ोरी, विवशता का प्रदर्शन करते हैं । अपने विवेक बुद्धि पर भरोसा नहीं है क्या ?
तो भाई , भय,जलन, ईर्ष्या, द्वेष छोड़िए । डर के आगे ही जीत है । डर गए तो समझो मर गए ।

हाइकु

सोचता तो हूँ
सब गलत नहीं,
कुछ अच्छे भी ।

अख़लाक़ की बात

"चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों"
यह कोई फिल्मी गाना ही नहीं है
बल्कि इसमें मानव व्यवहार का एक कुशल गुण-मंत्र निहित है।
यदि हम किसी से परिचित हैं तो जब दूसरी बार मिले तो लगभग आप अपरिचित ही रहें
ऐसा न दिखाएं, प्रकट करें, गाएं, सुनाते फिरें कि आप  उनकी नाक के बाल हो जाएं। अरे, हम तो इनके बहुत घनिष्ठ, खासुलखास हैं
इससे उनको परेशानी होगी
और यदि आप भी दुनिया को यह बताते फिरें कि हम उनके बहुत अजीज हैं,  तो आप भी परेशानी में पड़ सकते हैं । थोड़ी दूरी हमेशा ही अच्छी होती है ज़्यादा लंबे, स्थायी सम्बन्ध और सही जिंदगी जीने के लिए ।

Citizens' action

Citizens should act and react as if they are in power.

बेशर्मी

एक हद तक बेशर्मी श्रेयस्कर है ।

Hinduism

Reverse of Islam is Hinduism today.

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

ज़ुल्म

ज़माने ने
बड़े जुल्म देखे हैं
उनके आगे
यह क्या है
जो मेरे ऊपर
तारी हुआ है ?😢

चल तो रहा हूँ ।

कविता?
चलने की तैयारी
करता रहता हूं तो लगता है
कि चल ही तो रहा हूं ।
मेरे पास कई झोले हैं
कई आकार और प्रकार के
विभिन्न,
कम या ज्यादा सामान ले जाने के लिए
मैं तैयार रहता हूं
मेरे पैर नहीं चलते
केवल मेरा दिमाग चलता है
तो चल ही तो रहा हूं
मैं चलने की तैयारी करता रहता हूं
तो लगता है कि मैं चल ही तो रहा हूं ।
- - -  
(उग्रनाथ नागरिक)

गुनगुनी धूप

एक पखवारे से मैं अंदर अंदर बड़े अवसाद में हूँ । पता नहीं कब तक रहूँगा । एक 7 साल की बच्ची ने अब बड़ी होकर, तब 81 वर्ष के बुजुर्ग लगभग विक्षिप्त हुए अति सम्मानित महा जनकवि बाबा नागार्जुन पर जो दुर्व्यवहार का आरोप लगाया उससे मैं आहत हुआ । यह दुर्घटना मेरे दिमाग़ से उतर ही नहीं रही है । कौन सही कौन गलत तय ही नहीं कर पा रहा हूँ । समझ में नहीं आता मैं बाबा की तरफ से शर्मिंदगी महसूस करूँ, उस पाप का पश्चाताप करूँ, या साहित्य-संस्कृति विभाग की ओर से आरोपकर्ता के ऊपर मानहानि का मुकदमा ठोंकूँ ? बाबा के उत्तराधिकारी सारे नर नारी कवि लेखक साहित्यकारों की चुप्पी अप्रत्याशित है ।
अनिर्णय और क्षोभ की दशा में मैंने दो काम किये । एक तो बाबा की नज़ीर देकर मैंने इधर मृत्युदण्ड प्राप्त अपराधियों के लिए क्षमादान की माँग की । (जब बाबा जैसी हस्ती ऐसा करने पर विवश हुई तो उन लफंगों की क्या सांस्कृतिक हैसियत?)
दूसरे - फेसबुक पर किसी महिला मित्र के पोस्ट को Like/Comment, प्रतिक्रिया बिल्कुल बन्द। इनसे दूर रहने में ही अपनी इज्ज़त की सुरक्षा है । इनके प्रति मेरी दृष्टि तीखी हो गयी है । Sorry, Very sorry!😢

उम्रदराज़

कुछ उम्र गुज़ार लेना भी शिक्षा का एक तरीका होता है !

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

हिन्दू जिन्ना

हम मुसलमान नहीं हैं कि जिन्ना कह दें और हम देश बाँटकर पाकिस्तान बना लें ! और आप जिन्ना की भूमिका में हो, हिन्दू जिन्ना । हम देश बाँटकर हिंदुस्तान नहीं लेंगे । हम देश को बँटने नहीं देंगे !

क्रांति की पाठशाला

मैं क्रांतिकारी बनूँ, इससे बेहतर होगा मैं क्रांतिकारी बनाऊँ । अनगिनत, अगणित ! हम अकेले कितनी क्रांतियाँ सँभालेंगे ? कारगर होगा "जितने लोग उतनी क्रांतियाँ" की रणनीति । जिससे क्रांति चलती रहे । किसी व्यक्ति- विचारधारा के बाद रुक न जाये ।

जननी कौन ?

तीन हाइकु
- - - - - - -
कहाँ जाते हो
मंदिर में घण्टा है
बहुत टंटा !
- -
अच्छे दिन का
इंतज़ार ख़तम
नहीं आएँगे !
- - -  
हाँ,अवस्था तो
आपत्तिजनक है,
जननी कौन ?

सोमवार, 20 जनवरी 2020

असली रजिस्टर

https://www.facebook.com/groups/147949709310396/

परेशान नागरिक

मुझे डिमोक्रेसी से कुछ परेशानी हो रही है । इसमें नागरिक को बहुत सचेत, जागरूक रहना पड़ता है । हर समय देखते रहो, सरकार कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रही है ? करे, तो फौरन घर से निकलकर धरना प्रदर्शन करो, गला फाड़कर चिल्लाओ, और पुलिस के डंडे खाओ, और जेल की हवा ।😢 हरदम सशंकित रहो । बिल्कुल Watchdog, कुत्ते की तरह ज़िंदगी ! ठीक से सोने को नहीं मिलता । और सोओ भी तो कुकुरनिंदिया । ज़रा सी आहट पर जाग कर चौथा खम्भा पकड़कर भोंको (कुत्ता और खम्भा हास्यपरक युग्म है 😢), मेरा मतलब पत्रकारिता से था । है न परेशानी की बात ?

शूद्र हिन्दू

By - Hirday Nath
जातिवाद का सच क्या है ???
अंग्रेज़ी दैनिक (Hindustan Times, 22 September,2014) की रिपोर्ट के अनुसार ,राष्ट्रीय स्वयम सेवक सघं की नवीनतम थ्यूरी के अनुसार हिन्दू धर्म में लेश मात्र भी ४ वर्ण पर आधारित घृणित छुआछूत जन्य जातिवाद नहीं है.वह तो केवल मुस्लिम राज्य के समय मल्लेच्छों की देन है.
यूं तो जातिवाद हिन्दू धर्म के प्रत्येक ग्रन्थ का अभिन्न अंग है,परन्तु मैं यहां केवल ब्रह्म सूत्र से सम्बन्धित विषय पर संदर्भ प्रस्तुत कर रहा हूं जिन की रचना भारत में मुस्लिम राज्य से कई शताब्दीयों पहले हुई थी और न ही भाष्यकर्ता रामानुज मल्लेच्छों का पक्षपाती था.
# शूद्र का वेद सुनना वेद पढना अर्थ समझना एवं अनुष्ठान निषिद्ध हैं.
# शूद्र चलता फिरता शमशान है,उस के समीप वेद नहीं पढना चाहिए.
# शूद्र पशु सदृश है.
# यदि शूद्र वेद को सुन ले तो राजा उस के कानों में सीसा व लाख पिघला कर ड़ाल दे.
# यदि शूद्र वेदमंत्र का उच्चारण करे तो उस की जीब काट देनी चाहिए.
# यदि शूद्र वेद मंत्र को याद कर ले तो उस का शरीर चीर देना चाहिए.
# शूद्र को धर्म अथवा व्रत न सिखाओ.
टिप्पणी ;यदि हिन्दुत्व वादी सचमुच समाज में मानवतावाद पर आधारित बन्धुत्व और एकता स्थापित करना चाहते हैं तो उन्हें ऐसे सभी गन्थों का बहिष्कार करना चाहिए,क्योंकि इस प्रकार की मानसिकता भारतीय संविधान के अन्तरगत नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की घोर उल्लंघना है.देरी काहे की ?सरकार भी तो उन्ही की है.

बाबा नागार्जुन का "चूल्हा रोया"!

मैं इंदिरा जयसिंह की भाँति अपराधियों के मृत्युदण्ड से क्षमा किये जाने की वकालत करता हूँ, अलबत्ता उनका कृत्य जघन्य था । लेकिन उनकी फाँसी से यह अपराध समाप्त न हो जायेगा , धड़ाधड़ हो रहे हैं, कानून के बावजूद। इसका निदान कहीं और मसलन शिक्षा में है । वह तो ही नहीं रहा।
तो भी बहुत भुगता इन नासमझों ने 7 साल जेल में रहकर । पर्याप्त यातना सह ली । एक ने तो आत्महत्या कर ली, इन्हें भी अवसर मिलता तो कर लेते । इनकी भी पीड़ा समझनी चाहिए । जब 81 वर्ष के महाजनकवि नागार्जुन 7 साल की गुनगुन थानवी से कुछ कर सकते हैं तो उन लफंगों की क्या मानसिक, नैतिक हैसियत थी ? उन्होंने अपराध किया उन्होंने भुगता । मैं अपनी सोच में if-but लगाने वाला 'लेकिनवादी" नहीं हूँ । मैं मृत्युदण्ड और आँख के बदले आँख का विरोधी हूँ । इसलिए क्षमादान माँगना मुझे वाजिब लगा, तो लिख दिया । यूँ फाँसी देना, न देना मेरे हाथ में तो है नहीं । इन जीवों को मारकर जिन्हें खुशी हो उन्हें मुबारक़ । 😢
#चूल्हारोया